राष्ट्रीय
29-Nov-2025


नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना के एक अधिकारी लेफ्टिनेंट सैमुअल कमलेसन को सेवा से बर्खास्त करने के फैसले को सही माना है। लेफ्टिनेंट कमलेसन ने अपनी सिख रेजिमेंट में धार्मिक परेड के दौरान मंदिर और गुरुद्वारे में प्रवेश करने से इंकार किया था, क्योंकि वह एक प्रोटेस्टेंट ईसाई थे और उनका मानना था कि गैर-ईसाई धर्मस्थलों में प्रवेश करना उनके धार्मिक विश्वास के खिलाफ था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने निजी आस्था और सैन्य अनुशासन के बीच संतुलन पर बड़ी बहस छेड़ दी है। सियासी गलियारों में लेफ्टिनेंट कमलेसन की चर्चा तेज हो गई है। कौन हैं लेफ्टिनेंट कमलेसन कमलेसन को मार्च 2017 में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त किया था। उन्हें सिख, जाट और राजपूत कर्मियों की तीन स्क्वाड्रन वाली तीसरी कैवलरी रेजिमेंट में नियुक्त किया था। उन्हें सिखकर्मियों वाली स्क्वाड्रन बी का ट्रूप लीडर बनाया गया था। लेकिन उन्होंने गुरुद्वारे में पूजा करने के लिए जाने से अपने सीनियर के आदेश को मना किया था। उन्होंने कहा था कि उनका एकेश्वरवादी ईसाई धर्म इसकी इजाजत नहीं देता। इसके बाद उन्हें साल 2021 में सेना का अनुशासन तोड़ने के लिए निकाल दिया गया था। लेफ्टिनेंट कमलेसन 2017 में सेना में शामिल हुए और तीसरी कैवलरी रेजिमेंट में सेवा की। इस रेजिमेंट में मुख्य रूप से जाट, राजपूत और सिख समुदायों के सैनिक भर्ती होते हैं। वे यूनिट के मंदिर और गुरुद्वारे में धार्मिक परेड और उत्सवों में शामिल होते थे, लेकिन भर्ती होने के कुछ समय बाद ही उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर हिंदू पूजा अनुष्ठान करने से छूट मांगी, यह दावा करते हुए कि यह उनकी ईसाई मान्यताओं के विरुद्ध है। कई चेतावनियों के बाद 2021 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया, जिससे उन्हें अपनी पेंशन पात्रता और ग्रेच्युटी लाभ का फायदा नहीं मिला। इसके बाद लेफ्टिनेंट ने बर्खास्तगी को चुनौती देकर सेवा में बहाल करने की मांग की थी। यह मामला व्यक्तिगत आस्था और सेना के अनुशासन के बीच एक नाजुक संतुलन को दिखाता है। लेफ्टिनेंट कमलेसन का मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे सैनिकों की व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताएं उनके सैन्य कर्तव्यों के साथ टकरा सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बात पर जोर देता है कि सेना में अनुशासन सर्वोपरि है, लेकिन यह भी सवाल उठाता है कि क्या व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर सकते है। आशीष/ईएमएस 29 नवंबर 2025