अयोध्या(ईएमएस)। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि तेजी से उभरता आर्थिक महाकेंद्र बन चुकी है। 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्राण-प्रतिष्ठा और धर्म ध्वज फहराए जाने के बाद से रामलला के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं-पर्यटकों की बाढ़ सी आ गई है। दो साल पहले जहां सालाना 5.5-6 करोड़ लोग आते थे, वहीं इस साल के अंत तक 50 करोड़ का आंकड़ा छूने की संभावना है। अकेले जनवरी से जून 2025 तक करीब 23 करोड़ लोग अयोध्या पहुँच चुके हैं। पर्यटकों की इस अभूतपूर्व आमद ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को रॉकेट की रफ्तार दे दी है। होटल-रिसॉर्ट, रेस्तरां, फुटकर दुकानें, टैक्सी-ऑटो से लेकर हस्तशिल्प कारोबार तक हर क्षेत्र में उछाल आया है। पिछले दो वर्षों में एक दर्जन से ज्यादा तीन व पांच सितारा होटल परियोजनाएँ शुरू हो चुकी हैं। डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए अयोध्या अब युवाओं की पहली पसंद बन रही है। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर से श्रद्धालु यहाँ पहुँच रहे हैं। आधारभूत संरचना के मामले में अयोध्या ने विश्व के बड़े धार्मिक पर्यटन स्थलों को पछाड़ दिया है। चमचमाता राम पथ, धर्म पथ, भव्य घाट, पुनर्जनित कुंड, संस्कृति से सजे चौराहे और स्वच्छ-सुघड़ सड़कें शहर की नई पहचान हैं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अब 30 से अधिक उड़ानें संचालित हो रही हैं, जिनकी सालाना यात्री क्षमता 60 लाख है। नया रेलवे स्टेशन विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है, जबकि बस अड्डों का भी कायाकल्प हो चुका है। आर्थिक आँकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। वर्तमान में अयोध्या उत्तर प्रदेश के कुल जीएसडीपी में करीब 1.5 प्रतिशत का योगदान दे रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले 4-5 वर्षों में यहाँ सालाना कारोबार 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन और रियल एस्टेट सेक्टर में हजारों नए रोजगार सृजित हो रहे हैं। राम मंदिर ने न सिर्फ आस्था को नया आयाम दिया, बल्कि अयोध्या को विश्व के नक्शे पर एक चमकता आर्थिक सितारा बना दिया है। दीपावली, राम नवमी और अन्य पर्वों पर यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या देखते हुए लगता है कि 2026 तक अयोध्या विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल बनने की राह पर है। वीरेंद्र/ईएमएस 29 नवंबर 2025