व्यापार
29-Nov-2025


- विनिर्माण क्षेत्र की 9.1 फीसदी की छलांग से जीडीपी अनुमान से ऊपर नई दिल्ली (ईएमएस)। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर) में भारत की आर्थिक वृद्धि 8.2 फीसदी पर पहुंच गई, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच छह तिमाहियों में सबसे ऊंचा स्तर है। यह वृद्धि दर आधिकारिक और निजी संस्थानों द्वारा अनुमानित 7 से 7.5 फीसदी तथा भारतीय रिजर्व बैंक के 7 फीसदी अनुमान से भी काफी अधिक रही। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक कम आधार प्रभाव और सॉफ्ट डिफ्लेटर ने वृद्धि को गति दी, लेकिन सबसे बड़ा योगदान विनिर्माण क्षेत्र से मिला। विनिर्माण ने अमेरिकी शुल्क दबाव के बावजूद 9.1 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज कर अपनी लचीली क्षमता का प्रदर्शन किया। जुलाई–सितंबर में नॉमिनल जीडीपी 8.7 फीसदी बढ़ी, जबकि वित्त मंत्रालय ने पूरे वित्त वर्ष के लिए इसे 10.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। वास्तविक और नॉमिनल वृद्धि के बीच अंतर वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे कम रहा है। नॉमिनल वृद्धि में कमी से कर संग्रह के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है और केंद्र सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसदी पर सीमित रखना कठिन हो सकता है। पहली तिमाही की 7.8 फीसदी वृद्धि के बाद वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में औसत जीडीपी वृद्धि 8 फीसदी रही है, जिससे अर्थशास्त्रियों ने अपने वार्षिक अनुमान संशोधित किए हैं। क्रिसिल ने अपना अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। सेवा क्षेत्र 9.2 फीसदी की दर से बढ़ा, जबकि कृषि ने 3.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की, जो पहली तिमाही के 3.7 फीसदी से थोड़ा कम है। कुल मिलाकर, बेहतर तिमाही प्रदर्शन के बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि रिजर्व बैंक आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में दर कटौती का रुख अपना सकता है। सतीश मोरे/29नवंबर ---