- नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला और सुधारों के बाद रेटिंग में सुधार का संकेत नई दिल्ली (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जल्द ही भारत के राष्ट्रीय लेखा डेटा के लिए अपनी वर्तमान ‘सी’ रेटिंग को अपग्रेड करने वाला है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब केंद्र सरकार फरवरी 2026 में खुदरा महंगाई और आर्थिक उत्पादन को ट्रैक करने के लिए नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला जारी करने वाली है। आईएमएफ ने इस सप्ताह जारी रिपोर्ट में लगातार दूसरे साल भारत के डेटा को ‘सी’ रेटिंग दी, जो चार स्तर वाले पैमाने में दूसरा सबसे निचला स्तर है। इसका मतलब है कि आंकड़ों में कुछ कमियां हैं, लेकिन वे आर्थिक निगरानी के लिए पर्याप्त हैं। आईएमएफ के बोर्ड में कार्यकारी निदेशक ऊर्जित पटेल और अन्य अधिकारियों ने बयान में कहा कि वे पिछले परामर्श के बाद भारत के आधिकारिक आंकड़ों में सुधारों की सराहना करते हैं और फरवरी 2026 में प्रकाशित होने वाली नई डेटा श्रृंखला के बाद रेटिंग अपग्रेड की जाएगी। आईएमएफ के कर्मचारियों ने माना कि भारत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) निर्धारित करने के तरीके में सुधार के साथ राष्ट्रीय लेखा बेंचमार्क में बदलाव की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल वस्तुओं और उनके भारांश में भी बदलाव किया जा रहा है ताकि मौजूदा उपभोग पैटर्न का बेहतर प्रतिनिधित्व किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अपग्रेड से वैश्विक निवेशकों और आर्थिक विश्लेषकों के लिए भारत के आर्थिक आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। यह कदम न केवल डेटा की पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत की आर्थिक निगरानी और नीति निर्माण में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण संकेत है। सतीश मोरे/29नवंबर ---