चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर फिर उठे सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वोट चोरी और साइबर मैन्युपलेशन के एक बड़े मामले में जांच एजेंसियों ने चौंकाने वाली जानकारी का खुलासा किया है। इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी की प्रारंभिक पूछताछ से पता चला, कि वोट चोरी के तार सीधे अमेरिका में बैठे एक विदेशी नेटवर्क से जुड़े हुए थे। यह गिरफ्तारी न केवल चुनाव आयोग, बल्कि देश की साइबर सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बड़ा संकेत मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्रकोष्ठ की एक संयुक्त टीम ने दिल्ली और मुंबई में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया, जिसकी पहचान अजय मिश्रा (बदला हुआ नाम) के रूप में हुई है। एजेंसियों का दावा है कि अजय मिश्रा पिछले छह महीनों से एक विदेशी सर्वर के ज़रिए मतदाता डेटा में अनाधिकृत हस्तक्षेप कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को तकनीकी निर्देश और फंडिंग अमेरिका स्थित एक साइबर ग्रुप से मिल रही थी। अधिकारी ने बताया कि आरोपी के लैपटॉप, सर्वर लॉग्स और ईमेल चैट से ऐसे कई दस्तावेज़ मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि मतदाता सूचियों में फेरबदल किया गया। कई संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों की वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का कार्य पूरी तरह डिजिटल तरीके से किया गया था। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया, कि अमेरिका में बैठे मास्टरमाइंड्स का उद्देश्य भारत के चुनावी परिणामों को प्रभावित करना था। जांच एजेंसियों ने इसे चुनावी सिस्टम पर बाहरी दखल का एक खतरनाक उदाहरण बताया है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा हो सकता है। इसलिए अगले कुछ दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। आयोग ने कहा कि डिजिटल वोटर डेटा की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा तथा साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल की पुन: समीक्षा की जाएगी। वहीं विपक्ष ने सरकार पर चुनावी तंत्र की सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि सरकार का कहना है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच की जाएगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया के किसी भी देश में चुनाव अब केवल राजनीतिक मैदान नहीं रह गए हैं, बल्कि साइबर युद्ध का नया मोर्चा बन चुके हैं। एसजे/ 29 नवम्बर/2025