29-Nov-2025
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-स्लीपर कोच बसों में ड्राइवर का अलग से बनाया कैबिन या पार्टिशन हटाया जाए नई दिल्ली,(ईएमएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर सार्वजनिक परिवहन बसों की असुरक्षित डिजाइन पर चिंता जताई। आयोग को मिली शिकायतों में आरोप लगाए गए हैं कि कई बसों में ड्राइवर केबिन को पूरी तरह अलग बनाया जा रहा है, जिससे आग लगने या आपात स्थिति में ड्राइवर और यात्रियों के बीच समय पर संवाद नहीं हो पाता। आयोग ने इसे यात्रियों की जान के लिए खतरा बताया और इसे मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत में यह भी कहा गया था कि हाल के दिनों में कई बसों में सफर के दौरान आग लगने की घटनाएं सामने आईं हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई। आयोग की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संरक्षण मानव अधिकार अधिनियम के तहत संज्ञान लिया और परिवहन मंत्रालय व केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान पुणे से दो सप्ताह के अंदर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है। सीआईआरटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजस्थान परिवहन विभाग के अनुरोध पर की गई जांच में हादसे वाली बस में कई खामियां मिलीं। बस बॉडी निर्माण में मानकों का उल्लंघन किया गया था। सीआईआरटी ने कई अहम सुझाव दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान का कहना है कि सभी स्लीपर कोचों में ड्राइवर के लिए अलग से बनाया कैबिन या पार्टिशन हटाया जाए। एफडीएसएस अनिवार्य रूप से लगाया जाए, 10 किलो के फायर एक्सटिंग्विशर चेक किए जाएं और नियमों के उल्लंघन वाले सभी बस बॉडी डिजाइन तत्काल बंद किए जाएं। आयोग ने कहा कि 14 अक्टूबर को जिस बस में आग लगी, वह पूरी तरह नियमों की अनदेखी का परिणाम था। न केवल निर्माता और बॉडी बिल्डर, बल्कि फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने वाले अधिकारी भी लापरवाही के दोषी हैं। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से क्रिमिनल नेग्लिजेंस करार दिया। रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने कहा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार सभी राज्यों को नियमों के सख्त पालन के लिए एडवाइजरी जारी करे। कोई भी बस ऑपरेटर या बॉडी बिल्डर सुरक्षा मानकों से बच न सके, इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर तंत्र तैयार किया जाए। सिराज/ईएमएस 29नवंबर25