29-Nov-2025
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-कई एनजीओ के द्वारा मिलती थी फंडिंग फरीदाबाद,(ईएमएस)। दिल्ली धमाका मामले की जांच नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) कर रही है। इसी कड़ी में आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉ. शाहीन सईद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फ्लैट से 18.50 लाख कैश सहित सोने के बिस्किट और गहने मिले है। इसके अलावा अलमारी से अरब देशों की करेंसी भी मिली है। एनआईए शाहीन को लेकर अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहुंची थी। एनआईए के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अंदर शाहीन का 22 नंबर फ्लैट है। फ्लैट में एनआईए की टीम काफी समय तक रही। जांच एजेंसी ने फ्लैट में रखी अलमारी का लॉक खुलवाया, जिसमें अंदर एक सीक्रेट लॉकर मिला। लॉकर के खुलने पर अंदर कई पैकेट रखे हुए थे। इन पैकेट में 500-500 रुपए के नोट थे। टीम ने जब इन नोटों की गिनती की तब ये 18 लाख रुपये निकले। इसके बाद एनआईए की टीम ने अलमारी के दूसरे लॉकर की तलाशी ली। इसमें सोने के 2 बिस्कुट के साथ करीब 300 ग्राम सोने के गहने बरामद हुए। सूत्रों ने बताया कि अलमारी से अरब देशों की करेंसी भी मिली है। डॉ. शाहीन के कई करीबी फंडिंग के लिए कई गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के संपर्क में थे। एजेंसी की जांच में सामने आया कि एनजीओ के माध्यम से पैसा मंगाने वाले गिरोह का नेटवर्क खाड़ी देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात तक है। जांच एजेंसी ने इसके बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एडमिन ब्लॉक में जाकर शाहीन के नाम पर रजिस्टर एक लॉकर को खोलकर चेक किया। इसमें जांच टीम को कुछ दस्तावेज मिले है, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया है। ये दस्तावेज क्या है, इसमें क्या मिला है? इसका अभी कोई खुलासा नहीं किया गया है। सूत्रों ने बताया कि शाहीन एजेंसी की जांच में सहयोग नहीं रही है। एनआईए की टीम सबसे पहले डॉक्टर शाहीन सईद को अल-फलाह मेडिकल यूनिवर्सिटी लेकर पहुंची। जहां बिल्डिंग में ले जाकर कमरे नंबर 22 में प्रवेश कराया, जहां वह रहती थी। शाहीन से जांच एजेंसी ने सभी प्रकार की जानकारी मांगी, जैसे कि वहां दिनभर क्या करती थी, कौन-कौन उससे मिलने आता था और किन लोगों से उसका नियमित संपर्क था। इसके बाद एनआईए ने मेडिकल वार्ड, क्लासरूम और उसके डॉक्टर कैबिन में ले जाकर वहां मौजूद गतिविधियों और उसके संपर्कों की पहचान कराई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शाहीन को यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर भूपिंद्र कौर आनंद के पास भी ले जाया गया, जहां दोनों की आमने-सामने पहचान करार्इ। यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि शाहीन यूनिवर्सिटी में रहते हुए कई संदिग्ध के संपर्क में थी। आशीष दुबे / 29 नवबंर 2025