* मुख्यमंत्री ने चिंतन शिविर के समापन पर अधिकारियों को ‘थिंकिंग वेल–डूइंग वेल’ की भावना जगाकर जनहित में कार्य करने की प्रेरणा दी वलसाड (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों का आह्वान किया कि विकसित गुजरात 2047 के लिए ‘अर्निंग वेल–लिविंग वेल’ के दो स्तंभों पर आधारित विकासयात्रा को अधिक गति देने हेतु सभी अधिकारी ‘थिंकिंग वेल–डूइंग वेल’ की भावना जगाएँ। वलसाड जिले के धरमपुर स्थित श्रीमद राजचंद्र आश्रम में ‘सामूहिक चिंतन से सामूहिक विकास की ओर’ थीम के तहत आयोजित 12वीं चिंतन शिविर का समापन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विक्सित भारत @ 2047 के संकल्प में गुजरात को विकसित गुजरात @ 2047 के रोडमैप के साथ अग्रणी बनाए रखने के लिए हमने जनता के लिए ‘अर्निंग वेल–लिविंग वेल’ का मंत्र तैयार किया है। उन्होंने कहा कि इस चिंतन शिविर से थिंकिंग वेल–डूइंग वेल की भावना को बल मिलेगा, जो इस रोडमैप को वैचारिक आधार प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री पटेल ने अधिकारियों को कर्तव्य और विभागीय दायित्वों की पूर्ण ओनरशिप के साथ समर्पण, जवाबदारी एवं जनहित की प्रतिबद्धता से काम करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जहाँ भी हम हों, अपना सर्वश्रेष्ठ कार्य देकर ही राज्य के विकास और आमजन के कल्याण हेतु वास्तविक संतोष प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि केवल फाइल वर्क से संतोष करने के बजाय नियमित फील्ड विज़िट, स्थल पर उपस्थिति, वास्तविक समस्याओं का समाधान और जनहित की संवेदना से कार्यक्षमता में कई गुना वृद्धि की जा सकती है। स्वयं द्वारा किए गए कार्य के मूल्यांकन से ही विकास की सही दिशा तय हो सकती है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 2003 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई चिंतन शिविर की परंपरा को टीम गुजरात की मेहनत और जनहित के सामूहिक चिंतन ने सफल बनाया है। 2003 की पहली चिंतन शिविर में नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई प्रेरणा—“हमारा अभिगम समन्वित हो, गाँवों को गरीबी से बाहर निकालें और कोई भी परिवार गरीबी रेखा से नीचे न रहे”—का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘जो कहा, वह किया’ के मंत्र को सार्थक किया है। करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर लाया गया है और भारत अब विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि गुजरात में सर्वांगीण विकास की इसी दिशा में पिछले ढाई दशक में प्रति व्यक्ति आय 19,823 रुपये से बढ़कर 3 लाख 22 हजार रुपये तक पहुँची है। तीन दिवसीय चिंतन शिविर में हुई सामूहिक चर्चा से प्राप्त सुझावों को अमल में लाकर टीम स्पिरिट के साथ विकास को गति देने का मार्गदर्शन भी उन्होंने दिया। मुख्यमंत्री ने कुपोषण के विरुद्ध सामूहिक अभियान प्रारंभ करने का संकल्प भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री पटेल ने यह भी कहा कि सामूहिक समूह चर्चा से निकले विषयों का समय-समय पर मूल्यांकन हो और अगली चिंतन शिविर में नई ऊर्जा और ऊँचे लक्ष्यों के साथ मिलने की अपेक्षा भी उन्होंने रखी। नायब मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गंभीर मनन और चिंतन से राज्य के अंतिम मानव के कल्याण और विकासयात्रा को गति देने का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि तीन दिनों के सामूहिक मंथन से तैयार मुद्दे केवल आर्काइव में न रह जाएँ, बल्कि उचित दस्तावेजीकरण द्वारा उसका लाभ सीधे गुजरात के सामान्य नागरिकों तक पहुँचे। संघवी ने आग्रह किया कि चिंतन शिविर में जो नया सीखा है, उसे लोककल्याण के लिए जमीनी स्तर पर लागू करें। केवल सचिवालय स्तर पर नहीं, बल्कि जिला प्रशासन तक इस शिविर की फलकृति पहुँचे। उन्होंने कहा कि राजचंद्र आश्रम के आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित यह चिंतन शिविर जनहित और गरीबों के दुख-दर्द मिटाने का संवेदनापूर्ण माध्यम बनेगा। समापन अवसर पर राज्य मंत्रिमंडल के मंत्री, मुख्य सचिव एम.के. दास, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार डॉ. हसमुख अधिया सहित वरिष्ठ सचिव, जिला कलेक्टर, विकास अधिकारी आदि उपस्थित थे। सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक सुधार एवं प्रशिक्षण प्रभाग के सचिव हर्षित शुक्ला ने शिविर की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। सतीश/29 नवंबर