राष्ट्रीय
29-Nov-2025


अदालत ने माना, बच्चियां घर में रिश्तेदारों के बीच भी सुरक्षित नहीं इंदौर (ईएमएस)। अत्यंत गंभीर और हृदय विदारक अपराध के मामले में इंदौर की जिला अदालत ने ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाया है। जिला अदालत ने आरोपी मौसा को तीन अलग-अलग धाराओं में दोषी मानकर तीन अलग-अलग आजीवन कारावास (तिहरी उम्रकैद) की सजा सुनाई गई है। साथ ही 30,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने पीड़िता के माता-पिता को तीन लाख रुपये प्रतिकर (मुआवजा) दिए जाने की अनुशंसा की है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने रिश्ते में मौसा होकर भरोसे और रिश्ते दोनों को कलंकित किया और 14 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म कर उसकी हत्या की। यह घटना दिखाती है कि महिलाएं और बेटियां केवल बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर रिश्तेदारों के बीच भी सुरक्षित नहीं हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिस मानसिक विकृति और क्रूरता से अपराध किया गया, उसमें आरोपी के प्रति नरमी न्यायसंगत नहीं होगी। 14 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म (रेप) के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। ये वारदात 21 जून 2022 को हुई। किशोरी की मां और बहनें मजदूरी पर गई थीं और पिता काम से बाहर थे। शाम को लौटने पर मां को बेटी गायब मिली और पास के कमरे में रहने वाले मौसा का कमरा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़ने पर लड़की का शव खून से लथपथ मिला, और मौसा भी घायल अवस्था में पड़ा था। किशोरी के गले, चेहरे और पेट पर गहरे चोट के निशान थे। प्राइवेट पार्ट से खून बहने की पुष्टि हुई, जिससे दुष्कर्म साबित हुआ। कमरे से खून के नमूने, चाकू, ब्लेड, साड़ी का टुकड़ा जब्त किया गया। दोनों दरवाजे अंदर से बंद थे। जांच में पता चला कि आरोपी ने सबूत छिपाने और गुमराह करने के लिए खुद को भी चोट पहुंचाई थी। माता-पिता के कमजोर बयान के बावजूद, फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी की भूमिका को निर्णायक रूप से साबित कर दिया। यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि महिलाओं और बच्चों के प्रति ऐसे जघन्य अपराधों के लिए न्यायपालिका अत्यंत कठोर रुख अपनाएगी, भले ही अपराधी कोई करीबी रिश्तेदार ही क्यों न हो। आशीष दुबे / 29 नवबंर 2025