1500 स्नातक में से केवल 99 सर्जन नईदिल्ली (ईएमएस)। भारत के एमबीबीएस डॉक्टरों मे सर्जन बनने का क्रेज खत्म होता जा रहा है। हाल ही में 1500 टॉप रैंक वाले एमबीबीएस की परीक्षा पास कर चुके, स्नातकों ने सर्जरी में कोई रुचि नहीं दिखाई। 99 स्नातक छात्रों ने ही सर्जन के लिए प्रवेश लिया है। एमबीबीएस के स्नातकों में अब सर्जन बनने की रुचि देखने को नहीं मिल रही है। यह एक नए तरह का ट्रेंड है। 1500 छात्रों में से 632 ने जनरल मेडिसिन,447 छात्रों ने रेडियोलॉजी 99 छात्रों ने जनरल सर्जरी 1079 छात्रों ने मेडिसिन रेडियोलॉजी मे सुपर स्पेशलिटी कोर्स के लिए प्रवेश लिया है। एमबीबीएस कर चुके छात्रों में अब सर्जरी को लेकर कोई रुचि नहीं होने से विशेषज्ञ चिंतित हैं।यदि यही हालत रही, तो 10 साल के अंदर भारत में अच्छे सर्जन मिलना मुश्किल हो जाएगा। इस समय जनरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी के विशेषज्ञों की मांग जबरदस्त है। एमबीबीएस कर चुके छात्र इन्हीं दो विषयों में सबसे ज्यादा प्रवेश लेना चाहते हैं।जब इनमें प्रवेश नहीं मिलता है।तभी जाकर वह कोई दूसरा विषय चुनते हैं। एमबीबीएस कर चुके छात्रों का मानना है।सर्जन का कोर्स करने के बाद उन्हें सेटल होने में कई वर्ष लग जाते हैं। इसके अलावा कोर्ट कचहरी का डर भी हमेशा बना रहता है। ऑपरेशन थिएटर में काफी बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। ऑपरेशन के दौरान छोटी सी भी गलती उनको भारी पड़ जाती है। सर्जन के काम में तनाव हमेशा बना रहता है। जनरल मेडिसिन, रेडियोलॉजी एवं अन्य कोर्स में डॉक्टर एक निश्चित समय तक काम करते हैं। उन्हें इसके लिए अच्छा वेतन या अच्छी फीस मिलती है, रिस्क भी नहीं रहता है। इमरजेंसी ड्यूटी भी कम लगती है। जिसके कारण एमबीबीएस कर चुके छात्र परा- स्नातक कोर्स मे सर्जरी को सबसे अंतिम पायदान में रख रहे हैं। एसजे/ईएमएस/29/11/2025