राष्ट्रीय
29-Nov-2025


नई दिल्ली(ईएमएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं लोक सभा सांसद डॉ संबित पात्रा ने एसआईआर के संबंध में अखिलेश यादव के झूठ पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि, आज अखिलेश यादव ने भी भ्रामक वक्तव्य देने में कोई कमी नहीं छोड़ी और एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया। उनका यह कहना कि एसआईआर होने से आरक्षण समाप्त हो जाएगा, नौकरियां चली जाएंगी और महंगाई बढ़ जाएगी, तथ्यहीन आरोप हैं। एसआईआर क्या होता है, एसआईआर किस प्रकार संचालित होता है और एसआईआर का उद्देश्य क्या है, इन सभी विषयों पर अखिलेश यादव को पूर्व जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। स्पेशल रिवीजन और समरी रिवीजन क्या होते हैं, यह समझने से पहले आरक्षण और रोजगार जैसे विषयों को एसआईआर से जोड़ देना आश्चर्यजनक है। एसआईआर से नौकरी कैसे जाएगी और आरक्षण कैसे समाप्त होगा, यह प्रश्न स्वयं उनकी दावों को असत्य सिद्ध करता है। संदेह नहीं कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ममता बनर्जी जैसे नेता चुनाव लड़ने से पहले ही हार मान लेते हैं। बिहार में देखा गया कि तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पूरे दिन एसआईआर का उल्लेख करते रहे और उसका परिणाम क्या आया ये सबके सामने है। आज प्रकाशित समाचारों में आरजेडी की समन्वय बैठक और चिंतन शिविर में यह स्वीकार किया गया कि एसआईआर को लेकर किया गया शोर बेकार गया और उससे लाभ के स्थान पर हानि ही हुई। यही गलती अब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में दोहरा रहे हैं। यह और कुछ नहीं बस अग्रिम जमानत है। उन्हें पता है कि हार होने वाली है। करारी हार के साथ जो दुर्दशा बिहार में आरजेडी की हुई, वही परिस्थिति समाजवादी पार्टी की भी होने वाली है। इसी कारण भ्रामक बयान फैलाकर एसआईआर के विरोध का वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि दो दिन पहले सर्वोच्च न्यायालय ने कपिल सिब्बल द्वारा मनोज झा की याचिका पर हुई सुनवाई में व्यापक रूप से स्पष्ट किया कि बिहार में जिस प्रकार की आशंकाएं और शंकाएं व्यक्त की गई थीं कि एसआईआर से बड़े पैमाने पर नाम कट जाएंगे या वास्तविक मतदाता प्रभावित होंगे ऐसा कुछ नहीं हुआ। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि जिन कारणों से नाम हटाए गए वे मृत्यु, स्थान परिवर्तन और दोहराव जैसे तथ्यात्मक कारण थे और एसआईआर की प्रक्रिया सही ढंग से संचालित की गई। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिहार में एसआईआर के बाद नाम हटने की प्रक्रिया पर एक भी व्यक्ति ने शिकायत दर्ज नहीं कराई और सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि यदि किसी प्रावधान में त्रुटि या अनुचित प्रक्रिया दिखाई देगी तो न्यायालय हस्तक्षेप करेगा, किंतु एसआईआर कराना निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है और अब तक किसी प्रकार की गड़बड़ी दिखाई नहीं दी है। इसके पश्चात भी अखिलेश यादव एसआईआर के पीछे छिपने का प्रयास कर रहे हैं। ईएमएस/ 29 नवम्बर, 2025