भारतवर्ष को ‘एक भारत’ बनाने का कार्य सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था। 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोना सरदार पटेल की अद्भुत राष्ट्र–निर्माण क्षमता का प्रमाण था। बड़ोदरा(ईएमएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को बड़ोदरा, गुजरात में आयोजित सरदार@150 यूनिटी मार्च के तहत ‘सरदार गाथा’ कार्यक्रम को संबोधित किया। श्री नड्डा ने भारत की एकता और अखंडता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय कर भारत को एकीकृत राष्ट्र बनाया, प्रशासनिक ढांचे की नींव रखी और किसानों से जुड़कर राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत किया। कार्यक्रम के दौरान मंच पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार और भारत सरकार में राज्य मंत्री श्रीमति रानी सिंह बिट्टू व सांसद हेमंत जोशी सहित अन्य नेतागण उपस्थित रहे। श्री नड्डा ने कहा कि सरदार पटेल केवल हमारे राष्ट्रीय नायक नहीं थे बल्कि ‘राष्ट्र पुरुष’ थे। राष्ट्र पुरुष के रूप में उन्होंने हमारे पुरातन देश की जो कल्पना को केवल दो वर्ष के भीतर कार्यरूप देने का महत्वपूर्ण कार्य किया। आज हम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत’ की बात करते हैं, परंतु इसे ‘एक भारत’ बनाने का कार्य सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था। आने वाली अनेकों पीढ़ियां भी सरदार वल्लभभाई पटेल को स्मरण करेंगी जिन्होंने भारत को एक भारत, श्रेष्ठ भारत बनाने में अपना अद्वितीय योगदान दिया। श्री नड्डा ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन मेधावी तो था ही, साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के साथ देश को नए तरीके से जागृत करने का कार्य किया। इसलिए जब हम सरदार पटेल का स्मरण करते हैं तो यह ध्यान रखना आवश्यक है कि किस प्रकार उन्होंने शौर्य, हिम्मत, प्रतिबद्धता और सार्वजनिक जीवन के माध्यम से राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने के लिए स्वयं को समर्पित किया। सरदार पटेल जी की नेतृत्व क्षमता असाधारण थी। वह कम बोलते थे, पर उनका कार्य स्वयं बोलता था। 562 रियासतों को एक से डेढ़ वर्ष में एक सूत्र में पिरोना कोई साधारण कार्य नहीं था। आज एक–दो जिलों को जोड़ने या अलग करने में जितनी कठिनाई आती है, यह हम सब समझते हैं। 562 रियासतों को जोड़ना उस समय भी आसान नहीं था, विरोध भी हुआ होगा, कई लोगों ने उनकी बात मानने से इंकार भी किया होगा, पर सरदार पटेल जानते थे कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है। उन्होंने प्यार से, समझाकर और आवश्यक होने पर दृढ़ कार्रवाई कर सभी को राष्ट्र के साथ जोड़ा। नौजवानों से आग्रह है कि इतिहास पढ़ें और देखें कि किस प्रकार सरदार पटेल ने कई रियासतों को मनाया, कईयों को संघों में संयोजित किया और हर स्तर पर प्रयास करके 562 रियासतों को एक किया। जूनागढ़ और हैदराबाद के निजाम ने जब अलग दिशा में कदम बढ़ाया तो वहां सैन्य कार्रवाई के माध्यम से भी विलय सुनिश्चित किया गया। एक रियासत ऐसी थी जिसके बारे में जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इसका निर्णय वे स्वयं करेंगे, क्योंकि वह कश्मीरी थे। वह रियासत जम्मू कश्मीर थी, उन्होंने कहा कि यह राज्य छोड़ दें, यह निर्णय वे करेंगे। वही निर्णय देश की एकता और अखंडता में इतना बड़ा घाव बना जिसे धारा 370 के नाम से जाना गया और जम्मू-कश्मीर में आजादी के 70 सालों तक इसके कारण समस्या बनी रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नड्डा ने कहा कि सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय कर दिया था, पर जम्मू कश्मीर के विषय में निर्णय जवाहरलाल नेहरू ने लिया जबकि वहां महाराजा हरि सिंह हिन्दू शासक थे। इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर होते ही कोई भी रियासत भारत के संघ में विलय हो जाती थी। सरदार पटेल ने महाराजा हरि सिंह को भी इसके लिए राजी किया और महाराजा हरि सिंह ने हस्ताक्षर भी कर दिए। इसके बावजूद उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने धारा 370 का अड़ंगा लगा दिया और एक ऐसा प्रदेश बना जिसमें अलग झंडा, अलग प्रधानमंत्री और अलग विधानसभा का प्रावधान कर दिया गया। भारत की संसद का बनाया हुआ कानून वहां तभी लागू होता था जब जम्मू कश्मीर की विधानसभा उसे पारित करती थी। यह नासूर जैसा निर्णय उस समय जवाहरलाल नेहरू ने लिया। सरदार पटेल को याद करते समय यह समझना आवश्यक है कि देश की एकता और अखंडता के लिए कौन कार्य कर रहा था और देश को कमजोर करने वाला निर्णय कहां लिया गया? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इच्छा शक्ति और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के कारण 1950–51 में लगाई गई धारा 370 को समाप्त किया गया। 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सांसदों ने मतदान द्वारा दो-तिहाई बहुमत से धारा 370 को हटाकर उसे समाप्त किया और जम्मू कश्मीर को विधिक रूप से एक सूत्र में जोड़ा। सरदार पटेल का सपना पूरा करने का कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। श्री नड्डा ने कहा कि 5 अगस्त 2020 से पहले जम्मू कश्मीर में आरक्षण नहीं था, अनुसूचित जनजाति की कोई सीट नहीं थी और लोकसभा में भी अनुसूचित जनजाति का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। जबकि वहां बड़ी संख्या में गुर्जर, जनजातीय और मुस्लिम गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। परंतु विधानसभा और लोकसभा में उनका कोई स्थान नहीं था। पहली बार जम्मू कश्मीर में विधानसभा बनी, जिसमें जम्मू कश्मीर के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज को प्रतिनिधित्व मिला और यह सुनिश्चित किया गया की लोकसभा में भी अनुसूचित जनजाति की सीट निर्धारित होगी। ‘प्रिवेंशन अगेंस्ट चाइल्ड सेक्स अब्यूज’ का कानून जम्मू कश्मीर में लागू नहीं था, घरेलू हिंसा का कानून लागू नहीं था और यदि जम्मू कश्मीर की कोई बहन किसी गैर-जम्मू कश्मीर निवासी से विवाह कर ले तो उसकी संपत्ति का अधिकार निरस्त कर दिया जाता था। इसी कारण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कहा था कि देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं होंगे और इसी कारण से सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय किया था। परंतु जवाहरलाल नेहरू ने धारा 370 का नासूर खड़ा कर दिया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हटाकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवाहन को पूरा किया। आज एक भारत, श्रेष्ठ भारत की जो सुगंध महसूस हो रही है वह इन बीच के कांटों को हटाए जाने का परिणाम है और भविष्य में भी ऐसे कांटे दोबारा न आएं इसका ध्यान रखना आवश्यक है। कांग्रेस पार्टी ने षड्यंत्रपूर्वक और इरादतन सरदार पटेल को इतिहास से भुलाने का प्रयास किया। सरदार पटेल का नाम न रहे और उनका स्मरण न किया जाए यह उनकी मंशा थी, यहां तक कि उनके अंतिम संस्कार में उस समय के कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आने से रोका गया था। हालांकि डॉ. राजेंद्र प्रसाद वहां उपस्थित हुए थे। जिस दिन सरदार पटेल ने अंतिम सांस ली थी उसी दिन से कांग्रेस ने इतिहास के पन्नों में उन्हें लुप्त करने का प्रयास प्रारंभ कर दिया था और इसे लंबे समय तक चलाया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने 1950 में अंतिम सांस ली। उसके बाद जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी, एक ही परिवार से प्रधानमंत्री हुए पर सरदार पटेल को कभी याद नहीं किया गया। वर्ष 1991 में लगभग चालीस वर्ष बाद सरदार पटेल को भारत रत्न देकर सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही सही मायने में जो सरदार पटेल का कद था, उनका नेतृत्व था और जो सरदार पटेल में अपने जीवन में भारत देश को योगदान दिया था, उसके अनुरूप सच्ची श्रद्धांजलि दी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 182 मीटर की यह मूर्ति भारत का गौरव है। गुजरात के लोग बताते हैं कि जब यह प्रतिमा बन रही थी तो उस समय कांग्रेस कहती थी, यह चुनाव का प्रयोजन है, इस से कुछ नहीं बदलने वाला और सब इसे भूल जाएंगे। बाद में जब 182 मीटर की यह प्रतिमा स्थापित हो गई और विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बनी तब ये कहा गया कि इतना धन क्यों खर्च किया जा रहा है, प्रतिमा बनाने से क्या होगा और इसका क्या परिणाम निकलेगा। अपने पूर्वजों की प्रतिमाएं कांग्रेस ने हर चौराहे पर लगाईं पर जब सरदार पटेल की 182 मीटर की प्रतिमा स्थापित हुई तो पूछा गया कि इससे क्या बन जाएगा? केवड़िया और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल प्रतिमा नहीं है यह एक सौ चालीस करोड़ देशवासियों की भावना का प्रतीक है। श्री नड्डा ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से विभिन्न प्रवाहों का समन्वय हुआ है जिनमें गंगा प्रवाह, नर्मदा प्रवाह, जमुना प्रवाह, गोदावरी प्रवाह और साबरमती प्रवाह सम्मिलित हैं। यह यात्रा सरदार पटेल की एक सौ पचासवीं जयंती पर उनके जन्म स्थान से कर्मस्थल तक श्रद्धांजलि स्वरूप संचालित हो रही है और इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का अंग बनना स्वयं में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वही मार्ग है जिसने राष्ट्र को एकता की दिशा में अग्रसर किया। सरदार पटेल के जीवन और कार्यों को स्मरण करते हुए यह यात्रा राष्ट्रीय एकता की भावना को पुनः प्रतिष्ठित करती है और इसे व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ है। आयोजक मंडल, मनसुख मांडविया और उनकी पूरी टीम ने इस यात्रा को जिस प्रकार आगे बढ़ाया है वह सराहनीय है। सभी प्रतिभागियों द्वारा प्रदर्शित प्रतिबद्धता इस राष्ट्रीय संकल्प को और सुदृढ़ करती है। ईएमएस/ 29 नवम्बर, 2025