राष्ट्रीय
29-Nov-2025


नई दिल्ली (ईएमएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर सार्वजनिक परिवहन बसों की असुरक्षित डिजाइन पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने बसों में अलग ड्राइवर केबिन को खतरनाक बताकर इसे यात्रियों के जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना है। आयोग को मिली शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कई बसों में ड्राइवर केबिन को पूरी तरह अलग बनाया जा रहा है, जिससे आग लगने या आपात स्थिति में ड्राइवर और यात्रियों के बीच समय पर संवाद नहीं हो पाता। आयोग ने इसे यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बताया और इसे अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन माना है। शिकायत में कहा गया था कि हाल के दिनों में कई बसों में सफर के दौरान आग लगने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई लोगों की मौत हो गई। आयोग की पीठ (जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियंक कानूनगो कर रहे थे) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संरक्षण मानवाधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया और परिवहन मंत्रालय व केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआईआरटी) पुणे से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी। सीआईआरटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राजस्थान परिवहन विभाग के अनुरोध पर की गई जांच में हादसे वाली बस में कई गंभीर कमियां मिलीं। बस बॉडी निर्माण में मानकों का उल्लंघन किया गया था। स्लीपर बसों में ड्राइवर पार्टिशन डोर नियमों के खिलाफ है, फिर भी लगाया गया था। 12 मीटर से लंबी बसों में कम से कम 5 आपात निकास अनिवार्य हैं पर उपलब्ध नहीं थे। सुबोध/२९-११-२०२५