राष्ट्रीय
20-Feb-2026
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-जोधपुर जेल से सीलबंद सबूत मंगाने का आदेश, हिरासत के आधार पर उठे सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर कानूनी विवाद अब अहम मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वांगचुक के पास मौजूद पेनड्राइव को सीलबंद बॉक्स में सीधे अदालत में पेश किया जाए। यही पेनड्राइव उनकी हिरासत का मुख्य आधार बताई जा रही है। सरकार का दावा है कि पेनड्राइव में वांगचुक के 23 भाषणों के वीडियो हैं। आरोप है कि इन भाषणों में उन्होंने लद्दाख के युवाओं को नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और ‘अरब स्प्रिंग’ जैसे विदेशी आंदोलनों से प्रेरित होकर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ भड़काया। इसी आधार पर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया। हालांकि वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर याचिका में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, हिरासत आदेश में जिन चार वीडियो का उल्लेख था, वे पेनड्राइव में मौजूद नहीं हैं। साथ ही भाषणों के ट्रांसक्रिप्ट में कथित रूप से गलत अनुवाद और अतिरिक्त सामग्री जोड़ने का आरोप भी लगाया गया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस भामी बराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की सटीकता पर संदेह जताया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि हिरासत अधूरे और संदिग्ध साक्ष्यों पर आधारित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी प्रमाण विधिवत उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। गौरतलब है कि 26 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाली पेनड्राइव से इस मामले की दिशा तय होने की संभावना है। हिदायत/ईएमएस 20फरवरी26