राष्ट्रीय
12-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि कोई उम्मीदवार अन्य पिछड़ा वर्ग के क्रीमी लेयर में आता है या नॉन-क्रीमी लेयर में यह सिर्फ आमदनी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इनकम ब्रैकेट के आधार पर क्रीमी लेयर का स्टेटस तय करना, पोस्ट की कैटेगरी और स्टेटस पैरामीटर का जिक्र किए बिना, कानून में साफ तौर पर टिकने लायक नहीं है। बता दें “क्रीमी लेयर” में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के ज्यादा अमीर और सामाजिक रूप से आगे रहने वाले सदस्य आते हैं जिन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के दायर से बाहर रखा गया है। यह नियम इंद्रा साहनी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस के बाद आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को सही ठहराया था, लेकिन अमीर तबकों को बाहर रखने का आदेश दिया था। बाद में सरकार ने ऐसे समूहों की पहचान करने के लिए 1993 में नियम बनाए। अभी, सालाना 8 लाख रुपए से ज्यादा कमाने वाला ओबीसी परिवार आम तौर पर क्रीमी लेयर का हिस्सा माना जाता है और आरक्षण पाने के अयोग्य हो जाता है। इस नियम का मकसद यह तय करना है कि कोटा मुख्य रूप से गरीब और ज्यादा पिछड़े ओबीसी समुदायों की मदद करे। इस कैटेगरी में ऊंचे संवैधानिक पदों, सीनियर सरकारी पदों, ऊंचे पदों पर काम करने वाले लोगों, या अच्छी-खासी प्रॉपर्टी और बिजनेस इनकम वाले लोगों के बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। इनकम लिमिट को आखिरी बार 2017 में 6 लाख से 8 लाख रुपए किया गया था। सिराज/ईएमएस 12मार्च26 --------------------------------