अंतर्राष्ट्रीय
12-Mar-2026


अमेरिकी विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने ‘संतुलन की नीति’ अपनाने की दी सलाह वाशिंगटन,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती बढ़ती जा रही है। अमेरिकी दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने कहा कि भारत को अपने रणनीतिक हितों, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को ध्यान में रखते हुए बेहद सावधानी से कदम उठाने होंगे। मौजूदा हालात में भारत के लिए अपनी पारंपरिक ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति को संतुलित रखना आसान नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि भारत ऐसी स्थिति में है जहां उसके कई ऐसे देशों से करीबी रिश्ते हैं जो मौजूदा संघर्ष में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल हैं। इनमें ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। कुगेलमैन के मुताबिक पिछले कुछ सालों में भारत और इजराइल के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं, खासकर रक्षा सहयोग के क्षेत्र में। भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इजराइल से उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य तकनीक हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन संबंधों ने भारत के रणनीतिक समीकरण को और जटिल बना दिया है, क्योंकि इजराइल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए पश्चिम एशिया केवल रणनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और ऊर्जा के लिहाज से भी बहुत अहम क्षेत्र है। भारत की बड़ी मात्रा में तेल और गैस आपूर्ति इसी क्षेत्र से होती है। इसके अलावा खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और हित भी भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने ईरान के साथ भारत के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने ईरानी कच्चे तेल का आयात काफी कम कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ईरान अभी भी भारत के क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार रणनीति में एक अहम साझेदार बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान में स्थित चाबहार बंदरगाह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह परियोजना भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापारिक पहुंच देने का अहम मार्ग मानी जाती है। हालांकि अमेरिका के प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव के कारण इस परियोजना की प्रगति पर भी असर पड़ा है। कुगेलमैन का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भारत को बेहद सावधानी से अपने कूटनीतिक कदम तय करने होंगे। सिराज/ईएमएस 12मार्च26 ---------------------------------