रांची,(ईएमएस)। झारखंड विधानसभा में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुपूरक बजट पर तीखी बहस हुई। बहस के दौरान विधायक जयराम महतो ने स्वास्थ्य व्यवस्था को यूरोपीय देशों के स्तर पर सुधारने की बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता से बहुत दूर हैं, जबकि निजी अस्पतालों का कारोबार राज्य की तुलना में बड़ा है। महतो ने आरोप लगाया कि कई सचिव निजी भवनों में अस्पताल चला रहे हैं। उन्होंने एनुअल हेल्थ चेकअप कानून की मांगकर बताया कि झारखंड में एक डॉक्टर 7,500 लोगों के लिए है, जबकि आवश्यकता 1,000 लोगों पर एक डॉक्टर की है। नर्सिंग सीटों में भी भारी कमी है और स्वास्थ्य पर राज्य का खर्च जीडीपी का केवल 1 प्रतिशत है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक हेमलाल मुर्मु ने अनुपूरक बजट का समर्थन कर कहा कि अबुआ दवाखाना गरीबों के लिए राहत देगा। उन्होंने रिम्स-2 और प्रत्येक जिले में ओल्ड एज होम की आवश्यकता पर जोर दिया। प्राइवेट अस्पतालों पर नियंत्रण के लिए रेगुलेटरी कमेटी बनाने की मांग भी उठाई। विधायक अरूप चटर्जी ने 108 एंबुलेंस सेवा में खामियों का मुद्दा उठाया, जबकि लुइस मरांडी ने सरकार की मांगों को जायज माना। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रिम्स-2 को अन्य स्थान पर बनाने का समर्थन किया और कहा कि लोग इलाज के लिए बड़ी दूरी तय कर रहे हैं। उन्होंने डॉक्टर और नर्स की कमी, एयर एंबुलेंस की खराब स्थिति और लाभुकों को धोती-साड़ी, दाल, नमक और चीनी वितरण में समस्याओं पर चिंता जाहिर की। विधानसभा में स्वास्थ्य और खाद्य वितरण में गंभीर कमी, प्राइवेट अस्पतालों का बढ़ता प्रभुत्व, सरकारी सुविधाओं में पारदर्शिता और नर्सिंग व डॉक्टर की भारी कमी को लेकर जोरदार बहस हुई। विधायक सुधार, निगरानी और बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा मिल सके। आशीष दुबे / 12 मार्च 2026