मुबई (ईएमएस)। अपनी आगामी फिल्म ‘आखिरी सवाल’ को लेकर अभिनेत्री त्रिधा चौधरी और समीरा रेड्डी ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करने वाला सिनेमा है। त्रिधा चौधरी ने बताया कि फिल्म में उन्होंने ‘सारा’ नाम की एक छात्रा का किरदार निभाया है। उनके मुताबिक शैक्षणिक संस्थान केवल पढ़ाई की जगह नहीं होते, बल्कि वहीं से भविष्य के नेता और विचार तैयार होते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी विचारधारा होती है और वह उस पर पूरा विश्वास रखता है। त्रिधा का मानना है कि सिनेमा समाज में संवाद पैदा करने का सबसे प्रभावी माध्यम है और यह कलाकारों को अपनी बात कहने की आजादी देता है। उन्होंने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी समाज या वर्ग को बांटना नहीं है, बल्कि लोगों को गंभीर मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित करना है। फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि विचारधारा किसी भी इंसान के जीवन और फैसलों को किस तरह प्रभावित करती है। त्रिधा ने पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि सभी कलाकारों और तकनीकी सदस्यों ने इस विषय को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। वहीं समीरा रेड्डी लंबे समय बाद इस फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। फिल्म में उन्होंने वामपंथी विचारधारा रखने वाली महिला ‘डॉ. पल्लवी’ का किरदार निभाया है। उनका पात्र समाज के भीतर मौजूद कई दबे सवालों को सामने लाता है और कहानी में वैचारिक बहस को और तेज करता है। समीरा रेड्डी ने कोलकाता पहुंचने पर खुशी जताई और वहां के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘सिटी ऑफ जॉय’ में लौटना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। साथ ही उन्होंने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से करीब 20 साल बाद मुलाकात पर भी खुशी जाहिर की। समीरा ने फिल्म के निर्देशक अभिजीत वरन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने किसी तरह का उपदेश देने के बजाय केवल तथ्यों को सामने रखने की कोशिश की है। समीरा के अनुसार एक महिला कलाकार के तौर पर इतना सशक्त और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाना उनके लिए बेहद रोमांचक अनुभव रहा। मालूम हो कि फिल्म ‘आखिरी सवाल’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बाबरी मस्जिद जैसे संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में विचारधाराओं के टकराव और समाज में उनके प्रभाव को प्रमुखता से दिखाने की कोशिश की गई है। सुदामा/ईएमएस 18 मई 2026