अहमदाबाद (ईएमएस)| जब इतिहास पत्थरों से बोलने लगे और अतीत वर्तमान की आंखों में आंखें डालकर संवाद करने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि आप किसी संग्रहालय में खड़े हैं। संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं का भंडार नहीं होते, बल्कि वे हमारी संस्कृति का दर्पण और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का अनमोल खजाना हैं। हर वर्ष 18 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ मनाया जाता है। इस अवसर पर गुजरात अपने समृद्ध इतिहास को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर विश्व के सामने भव्य रूप में प्रस्तुत कर रहा है। गुजरात सदियों से कला, संस्कृति और विरासत का अग्रदूत रहा है। वडोदरा का प्रसिद्ध बड़ौदा संग्रहालय और चित्र गैलरी या भावनगर का बार्टन संग्रहालय ये स्थान दशकों से हमारी ऐतिहासिक पहचान को संजोए हुए हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में गुजरात सरकार ने संग्रहालयों की पारंपरिक परिभाषा को बदल दिया है। अब संग्रहालय केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि ‘अनुभव’ करने का माध्यम बन चुके हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गांधीनगर के कोबा स्थित महावीर जैन आराधना केंद्र के अत्याधुनिक संग्रहालय का उद्घाटन किया। यहां हजारों वर्ष पुरानी हस्तलिपियों, प्राचीन सिक्कों और जैन संस्कृति की दुर्लभ कलाकृतियों का वैज्ञानिक तरीके से डिजिटलीकरण किया गया है। यह केंद्र भविष्य में शोध और ज्ञान का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। वर्ष 2001 के विनाशकारी भूकंप के पीड़ितों की स्मृति में भुज में 470 एकड़ में निर्मित स्मृतिवन भूकंप स्मारक एवं संग्रहालय भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय माना जाता है। यहां विशाल मियावाकी वन, 50 चेकडैम और 12,932 पीड़ितों के नामों की स्मृति पट्टिकाएं स्थापित की गई हैं। विशेष थिएटर में ध्वनि, प्रकाश और कंपन तकनीक के माध्यम से भूकंप का जीवंत अनुभव कराया जाता है। इस संग्रहालय को यूनेस्को द्वारा विश्व के सात सबसे सुंदर संग्रहालयों में भी स्थान मिला है। महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित गांधीनगर स्थित दांडी कुटीर भारत का पहला हाईटेक संग्रहालय है। इसका 41 मीटर ऊंचा शंकु आकार का सफेद गुंबद नमक के ढेर का प्रतीक है, जो 1930 की ऐतिहासिक दांडी यात्रा की याद दिलाता है। यहां 3D मैपिंग, होलोग्राफी और 360 डिग्री प्रोजेक्शन तकनीक के माध्यम से गांधीजी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आधार भाग में स्थित संग्रहालय सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन पर आधारित ऑडियो-विजुअल और इंटरैक्टिव प्रदर्शनों से सुसज्जित है। यहां आदिवासी संस्कृति और क्षेत्रीय विरासत को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लोथल में विकसित हो रहा राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर प्रधानमंत्री के ‘विरासत भी, विकास भी’ विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य 5000 वर्ष पुराने भारत के समुद्री व्यापार और हड़प्पा सभ्यता को आधुनिक रूप में पुनर्जीवित करना है। यहां 14 भव्य गैलरियां, तटीय राज्यों के पवेलियन तथा ‘मेमोरियल’, ‘मैरिटाइम-नेवी’, ‘क्लाइमेट’ और ‘एडवेंचर’ जैसे चार विशाल थीम पार्क विकसित किए जा रहे हैं। वडनगर का प्रेरणा और पुरातात्विक संग्रहालय भारत की प्राचीन नगर योजना और सभ्यता की अद्भुत झलक प्रस्तुत करता है। यहां पुरातात्विक अवशेषों के माध्यम से भारत की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक प्रस्तुति शैली में दर्शाया गया है। आज गुजरात के संग्रहालय केवल कांच की अलमारियों तक सीमित नहीं हैं। अहमदाबाद स्थित साइंस सिटी अहमदाबाद की रोबोटिक गैलरी और एक्वेटिक गैलरी आधुनिक विज्ञान संग्रहालयों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जहां आगंतुक वीआर (वर्चुअल रियलिटी) और एआर (ऑगमेंटेड रियलिटी) तकनीक के माध्यम से विज्ञान और इतिहास को जीवंत रूप में अनुभव कर सकते हैं। भविष्य में सूरत और जामनगर जैसे शहरों में भी क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र विकसित करने की योजना है। साबरमती आश्रम और दांडी कुटीर जैसे संस्थान स्कूलों और कॉलेजों के साथ जुड़कर नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम की गाथा रोचक और आधुनिक तरीके से समझा रहे हैं। राज्य सरकार ने बजट में ‘हेरिटेज सर्किट’ के विकास पर विशेष जोर दिया है, ताकि सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और लोग अपने इतिहास से और अधिक जुड़ सकें। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2026 की थीम “सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक मतभेदों के बीच संवाद, समावेश और शांति को बढ़ावा देना” रखी गई है। यह थीम बताती है कि संग्रहालय केवल अतीत को संजोने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का सशक्त मंच भी हैं। संग्रहालय केवल भव्य इमारतें नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता और सभ्यता के प्रतीक हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने परिवार और बच्चों के साथ गुजरात की इस अमूल्य धरोहर का अवश्य दर्शन करें। सरकार के सतत प्रयास और नागरिकों की जागरूकता ही गुजरात के गौरवशाली अतीत को उज्ज्वल भविष्य तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। सतीश/18 मई