राष्ट्रीय
23-May-2026
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-होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में उभर रही गंभीर आशंकाएं नई दिल्ली,(ईएमएस)। आज सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही कब से सुचारू होगी। होर्मुज स्‍ट्रेट के पहले की तरह ओपन होने को लेकर टेंशन बढ़ाने वाली भविष्‍यवाणी सामने आई है। संयुक्‍त अरब अमीरात की बड़ी सरकारी तेल कंपनी के सीईओ ने अपने विश्‍लेषण के आधार पर कहा है कि ईरान जंग यदि इस वक्‍त खत्‍म होती है, तब होर्मुज से तेल और गैस की सप्‍लाई साल 2027 की पहली या फिर दूसरी तिमाही से सामान्‍य हो सकेगी। इसका मतलब यह हुआ कि पश्चिम एशिया में फैले तनाव के तुरंत खत्‍म होने के बाद भी होर्मुज से सप्‍लाई सामान्‍य होने में महीनों का वक्‍त लगेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर गंभीर आशंकाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यूएई की सरकारी तेल कंपनी के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने कहा है कि यदि आज ही संघर्ष समाप्त हो जाए, तब भी होर्मुज से तेल आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में 2027 की पहली या दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है। उनका यह बयान दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गहरी चिंता का संकेत है। अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जाबेर ने कहा कि मौजूदा हालात ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरी को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि यह संघर्ष कल भी समाप्त हो जाए, तब भी प्री-वॉर लेवल के 80 फीसदी तेल सप्‍लाई को बहाल करने में कम से कम चार महीने लगेंगे, जबकि पूर्ण बहाली 2027 से पहले संभव नहीं। होरमुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी पहले ही इस संकट को इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बता चुकी है। ईरान ने अब अपनी निगरानी का दायरा बढ़ाते हुए यूएई के गल्फ ऑफ ओमान तट को भी शामिल कर लिया है। हालांकि, यूएई के लिए फुजैरा बंदरगाह तक पहुंचने वाली कच्चे तेल की पाइपलाइन फिलहाल राहत का जरिया बनी है, जिससे कुछ अमीराती तेल निर्यात जारी है। सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के प्रमुख अमीन नासिर ने भी चेतावनी दी है कि यदि जून मध्य तक हालात नहीं सुधरे तो वैश्विक तेल बाजार 2027 तक पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाएगा। लंबे समय तक जारी यह संकट वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकता है और आर्थिक मंदी की आशंकाओं को तेज कर सकता है। इस संकट का असर पहले ही दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में करीब 30 फसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे परिवहन लागत बढ़ी और महंगाई तेज हो रही है और कई देशों की आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होरमुज में तनाव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है। सिराज/ईएमएस 23 मई 2026