राष्ट्रीय
23-May-2026
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चंडीगढ़,(ईएमएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर अपने पुराने रुख को बदलते हुए यूटर्न ले लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पंजाब सरकार अक्षरशः पालन करेगी। इससे पहले मुख्यमंत्री ने राज्य में आवारा कुत्तों के सफाई का अभियान शुरू करने की बात कही थी, जिसकी काफी आलोचना हो रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार ने अदालती निर्देशों के अनुरूप कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी सरकार की नीति साफ की। उन्होंने लिखा कि अदालत के निर्देशों के अनुसार, सभी भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाएगा ताकि बच्चे, बुजुर्ग और आम परिवार बिना किसी डर के घूम सकें। इसके साथ ही सरकार कुत्तों के लिए पर्याप्त संख्या में आश्रय स्थल (शेल्टर होम) बनाएगी और उनका सही तरीके से रखरखाव करेगी ताकि वहां उनकी उचित देखभाल की जा सके।मुख्यमंत्री ने आक्रामक कुत्तों से निपटने की योजना पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जो कुत्ते पागल हैं, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त हैं या अत्यधिक आक्रामक और खतरनाक हो चुके हैं और इंसानों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, उनके मामले में कानून के दायरे में रहते हुए दया-मृत्यु जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और एबीसी (पशु जन्म नियंत्रण) नियमों के प्रावधानों के तहत ही की जाएगी।सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले में मानव जीवन के खतरे को कम करने के लिए पागल, लाइलाज बीमार और आक्रामक कुत्तों को दया-मृत्यु देने की अनुमति दी है। शीर्ष अदालत ने अपनी व्यवस्था में साफ कहा कि जब इंसानों की सुरक्षा और जान की तुलना जानवरों के कल्याण से की जाती है, तो संवैधानिक संतुलन निश्चित रूप से मानव जीवन के संरक्षण और सुरक्षा के पक्ष में ही झुकेगा। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस संबंध में पूर्व में दिए गए आदेश को वापस लेने या बदलने के अनुरोध वाली सभी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। वीरेंद्र/ईएमएस/23मई 2026