नई दिल्ली (ईएमएस)। विश्व योग दिवस को कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, और इसी कड़ी में आयुष मंत्रालय प्रतिदिन नए योगासनों के फायदे, उनके अभ्यास की विधि और आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी साझा कर रहा है। उष्ट्रासन इसी अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी बताया गया है। योग एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोजाना कुछ मिनट का योग अभ्यास हमारे शरीर और मन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उनका मानना है कि छोटे-छोटे बदलाव वास्तव में बड़े परिणाम लाते हैं, और उष्ट्रासन इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, चेस्ट स्ट्रेचिंग करने और पीठ को मजबूती देने में बेहद असरदार है। यह कंधों व पीठ की अकड़न दूर कर थकान और तनाव को कम करता है, जिससे पूरे दिन की ऊर्जा बनी रहती है। इसके नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है, थायरॉइड ग्रंथि सक्रिय रहती है, और अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं में भी काफी राहत मिलती है। साथ ही, यह शारीरिक मुद्रा (पोस्चर) में सुधार कर आत्मविश्वास और मानसिक शांति बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति अधिक सक्रिय और प्रसन्न महसूस करता है। उष्ट्रासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं और अपने पैरों के अंगूठे पीछे की ओर रखें। अपने घुटनों को कूल्हे की चौड़ाई जितना अलग रखें और दोनों हाथों को कमर पर रखकर धीरे-धीरे पीछे झुकें। इसके बाद, अपने हाथों को एड़ियों पर रखें और छाती को आगे की ओर उठाएं। अपनी गर्दन को पीछे की ओर झुकाकर छत की ओर देखें, जिससे आपकी रीढ़ की हड्डी में अच्छा खिंचाव महसूस होगा। कुछ सेकंड इस मुद्रा में रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। शुरुआत में 10-20 सेकंड तक ही अभ्यास करें और बाद में धीरे-धीरे समय बढ़ाएं, जब शरीर अधिक लचीला हो जाए। इस आसन का अभ्यास करते समय कुछ सावधानियां रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आपको पीठ, गर्दन, घुटनों या कंधों में कोई गंभीर चोट या समस्या है, तो यह आसन न करें। हाई या लो ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति डॉक्टर की सलाह से ही इसका अभ्यास करें। सुदामा/ईएमएस 24 मई 2026