ज़रा हटके
24-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और मानसिक दबाव बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं। इसी तरह से बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर यानी खाने से जुड़ी समस्या भी तेजी से फैल रही है। हैल्थ विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल खाने की आदतों में बदलाव नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर स्थिति है। ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि उनका बच्चा सामान्य रूप से खाना खा रहा है या उसके भोजन और शरीर को लेकर सोच अस्वस्थ दिशा में जा रही है। यूनिसेफ के मुताबिक, ईटिंग डिसऑर्डर को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जब किसी बच्चे का खाना, वजन या व्यायाम के साथ रिश्ता असंतुलित और अस्वास्थ्यकर हो जाता है, तब यह समस्या विकसित होती है। इसमें बच्चा अपने आत्म-मूल्य को शरीर के वजन या दिखावट से जोड़ने लगता है। खाने के समय घबराहट, बार-बार वजन की चिंता करना, खुद को मोटा महसूस करना या भोजन से दूरी बनाना इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बच्चे की गलती नहीं होती, बल्कि कई मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक कारण मिलकर इस स्थिति को जन्म देते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ईटिंग डिसऑर्डर किसी भी उम्र, लिंग या शारीरिक बनावट वाले बच्चे को प्रभावित कर सकता है। मानसिक तनाव, एंग्जायटी, डिप्रेशन, परिवार में पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, सोशल मीडिया पर ‘परफेक्ट बॉडी’ का दबाव और घर में वजन या खाने को लेकर नकारात्मक बातचीत इसके बड़े कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि बच्चा लगातार कैलोरी गिनने लगे, कुछ खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूरी बना ले, चोरी-छिपे खाना खाए, खाने के बारे में झूठ बोले या जरूरत से ज्यादा व्यायाम करने लगे, तो यह गंभीर संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते समस्या की पहचान होने पर इसका इलाज आसान हो जाता है। माता-पिता को बच्चों से संवेदनशील तरीके से बात करनी चाहिए और उन्हें यह एहसास दिलाना चाहिए कि अच्छा खाना और खुद की देखभाल करना जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जरूरत पड़ने पर तुरंत मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने घर के माहौल को सकारात्मक बनाने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि खाने को अच्छा या बुरा कहने की बजाय संतुलित और पौष्टिक भोजन पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि भूख लगने पर खाना और पेट भरने पर रुकना शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है। माता-पिता को खुद भी स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम की आदत अपनानी चाहिए, क्योंकि बच्चे अक्सर वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। सुदामा/ईएमएस 24 मई 2026