अंतर्राष्ट्रीय
24-May-2026
...


तानाशाह ने अब तक नहीं चुकाई कारों की कीमत स्वीडन,(ईएमएस)। 1970 के दशक में उत्तर कोरिया ने स्वीडन से 1000 वोल्वो 144 सेडान कारें खरीदी थीं, लेकिन इसका भुगतान आज तक नहीं किया है। यह दुनिया के सबसे लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय बकायों में से एक है। 1974 में, उ.कोरिया खुद को एक तेज़ी से उभरती औद्योगिक शक्ति के रूप में पेश कर रहा था, और तत्कालीन नेता किम इल-सुंग आर्थिक विकास व विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने में लगे थे। इसी दौरान स्वीडन ने उ.कोरिया को एक संभावित व्यापारिक बाजार के रूप में देखा और दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते मज़बूत हुए। एक बड़े व्यापारिक समझौते के तहत, उत्तर कोरिया ने स्वीडिश कंपनियों से भारी मशीनरी, खनन उपकरण और औद्योगिक सामग्री के साथ-साथ 1000 नई वोल्वो 144 सेडान कारों का ऑर्डर दिया। तब पूरे सौदे की कीमत करीब 600 मिलियन स्वीडिश क्रोना थी, जो करीब 73 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर थी। वोल्वो ने ऑर्डर तैयार कर कारों को तुरंत प्योंगयांग भेज दिया। कारें उत्तर कोरिया पहुँचते ही सरकारी तंत्र में शामिल कर ली गईं और उनका इस्तेमाल अधिकारियों व बाद में टैक्सी के रूप में होने लगा। लेकिन स्वीडन को जिस भुगतान का इंतज़ार था, वह कभी नहीं आया। उत्तर कोरिया ने न कोई किस्त चुकाई और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक जवाब दिया। इस घटना को बाद में कई विदेशी राजनयिकों ने इतिहास की सबसे बड़ी कार चोरी तक कहा, हालांकि तकनीकी रूप से यह चोरी नहीं थी क्योंकि कारें कानूनी समझौते के तहत भेजी गई थीं। स्वीडिश सरकार की एक्सपोर्ट क्रेडिट एजेंसी ने बाद में वोल्वो कंपनी को भुगतान की भरपाई कर दी, जिससे कंपनी को तत्काल नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, इसका बोझ स्वीडन के करदाताओं पर पड़ा। दशकों के ब्याज के साथ, यह बकाया अब सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुँच चुका है और रिपोर्टों के मुताबिक 2 से 3 बिलियन स्वीडिश क्रोना के आसपास माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि स्वीडन आज भी हर साल दो बार उत्तर कोरिया को भुगतान रिमाइंडर भेजता है, लेकिन प्योंगयांग की ओर से कभी कोई जवाब नहीं दिया गया। यह मामला अब दुनिया के सबसे पुराने ओपन इनवॉइस के रूप में जाना जाता है। वोल्वो 144 कारें अपनी मज़बूती और सुरक्षा के लिए मशहूर थीं, यही कारण था कि खराब सड़कों और सीमित संसाधनों वाले उत्तर कोरिया में भी ये कारें दशकों तक चलती रहीं। 2010 के दशक तक प्योंगयांग की सड़कों पर इन कारों को देखा जाता रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि उस दौर में उत्तर कोरिया ने जापान, फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों की कंपनियों से भी बड़े पैमाने पर सामान खरीदा था, जिनमें से कई भुगतानों का निपटारा कभी नहीं किया गया। यही वजह है कि आज अधिकांश देश उत्तर कोरिया के साथ व्यापार में अग्रिम भुगतान या सख्त शर्तों को प्राथमिकता देते हैं। आशीष/ईएमएस 24 मई 2026