अंतर्राष्ट्रीय
24-May-2026
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दुबई (ईएमएस)। ताजा वैज्ञानिक शोध में ऊंट के आंसुओं को लेकर चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऊंट के आंसुओं में मौजूद विशेष प्रकार की एंटीबॉडीज कई खतरनाक सांपों के जहर को निष्क्रिय करने की क्षमता रखती हैं। यदि यह शोध सफल साबित होता है तो भविष्य में सांप के काटने से होने वाली मौतों को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है। यह शोध दुबई स्थित सेंट्रल वेटरनरी रिसर्च लेबोरेटरी और भारत के बीकानेर स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने ऊंटों को सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे बेहद जहरीले सांप के जहर की नियंत्रित मात्रा देकर इम्यूनाइज किया। इसके बाद ऊंटों के खून और आंसुओं के नमूनों की जांच की गई। लैब परीक्षणों में पाया गया कि ऊंट के आंसुओं में मौजूद नैनोबॉडीज जहर के कई घातक प्रभावों को रोकने में सक्षम हैं। इनमें आंतरिक रक्तस्राव, ब्लड क्लॉटिंग की समस्या और न्यूरोटॉक्सिन का असर शामिल है। शोधकर्ताओं का दावा है कि ऊंट के आंसुओं में मौजूद ये विशेष एंटीबॉडीज करीब 26 प्रकार के जहरीले सांपों के विष को निष्क्रिय कर सकती हैं। इनमें कोबरा, करैत और वाइपर जैसी खतरनाक प्रजातियां शामिल हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊंट से मिलने वाली कैमेलिड एंटीबॉडीज सामान्य एंटीबॉडीज की तुलना में काफी छोटी और अधिक स्थिर होती हैं। यही वजह है कि वे शरीर में तेजी से काम कर सकती हैं। इसके अलावा इन्हें सुरक्षित रखने के लिए अत्यधिक ठंडे तापमान की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में इनके इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सांप के जहर को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या मानता है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर इलाज नहीं मिलने से हजारों लोगों की जान चली जाती है। मौजूदा एंटीवेनम आमतौर पर घोड़ों या भेड़ों से तैयार किए जाते हैं, जो महंगे होने के साथ कई बार एलर्जी जैसी समस्याएं भी पैदा कर देते हैं। वहीं ऊंट आधारित एंटीवेनम अपेक्षाकृत सस्ता, सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऊंट के आंसुओं में प्रोटीन, एंजाइम और लाइसोजाइम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। जब ऊंट को जहर की छोटी मात्रा दी जाती है तो उसका शरीर विशेष एंटीबॉडीज तैयार करता है, जो आंसुओं तक भी पहुंच जाती हैं। यही नैनोबॉडीज विषैले तत्वों को निष्क्रिय करने में मददगार साबित हो सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने साफ किया है कि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह सफल मानना जल्दबाजी होगी। सुदामा/ईएमएस 24 मई 2026