भारत के खिलाफ रची जा रही साजिशों को बड़ा झटका नई दिल्ली,(ईएमएस)। पड़ोसी देश पाकिस्तान में भारत विरोधी तत्वों के सफाए का सिलसिला जारी है। बीते एक साल में, लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार कमांडरों से लेकर आईएसआई (आईएसआई) के अंडरकवर एजेंटों तक, कई प्रमुख भारत विरोधी चेहरे अज्ञात हमलावरों के निशाने पर आ गए हैं। यह सिलसिला हाल ही में अल-बद्र कमांडर बुरहान हमजा की मौत के बाद और सुर्खियों में आया है, लेकिन बीते एक साल से पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों में इसतरह के ऑपरेशन लगातार जारी हैं। इन घटनाओं ने न केवल आतंकी संगठनों में खलबली मचाई है, बल्कि भारत के खिलाफ रची जा रही साजिशों को बड़ा झटका दिया है। मई 2025 में, लश्कर के शीर्ष कमांडर मीर शुक्र खान का शव पाकिस्तान के क्वेटा में लावारिस हालत में मिला था। वह लश्कर में युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार में सक्रिय था। इसी महीने, सिंध प्रांत में लश्कर के एक और कमांडर सैफुल्लाह खालिद को अज्ञात हमलावर ने मार गिराया। अप्रैल 2025 में, खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर कमांडर शेख यूसुफ अफ्रीदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसे पांच गोलियां मारी गई थीं। मार्च 2025 भी इसतरह के कई बड़े झटकों का गवाह बना। लश्कर के हेडक्वार्टर मुरीदके के पास आतंकी कमांडर बिलाल आरिफ सराफी को नमाज के बाद चाकू घोंपकर मार दिया गया। इसी माह, हाफिज सईद का करीबी और लश्कर आतंकी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी पाकिस्तान के सिंध में मारा गया। वह 2024 के रियासी श्रद्धालुओं पर हुए हमले की साजिश में शामिल था। मार्च में ही, आईएसआई का अंडरकवर एजेंट मुफ्ती शाह मीर बलूचिस्तान में मारा गया था। वहीं फरवरी 2025 में भी दो अहम मौतें दर्ज हुई। हाफिज सईद के करीबी मौलाना काशिफ अली को खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में ही मदरसे में जुमे की नमाज के बाद हुए फिदायीन हमले में 57 वर्षीय मौलाना हमीदुल हक हक्कानी की जान चली गई। ये घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि पाकिस्तान के भीतर भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले और उन्हें समर्थन देने वाले तत्व अब सुरक्षित नहीं हैं। यह अज्ञात हमलावरों का ऐसा अभियान है जिसने भारत के दुश्मनों की कमर तोड़कर रख दी है। आशीष/ईएमएस 24 मई 2026