24-May-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी भारी तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच शांति समझौते का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर एक बेहद विवादित पोस्ट साझा कर नई कूटनीतिक जंग छेड़ दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि अमेरिका-ईरान युद्ध को रोकने के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग काफी हद तक तय हो चुका है, जिसके तहत दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, ईरान और कुछ अन्य देशों के बीच समझौते के आखिरी पहलुओं पर गंभीर चर्चा चल रही है, हालांकि इस पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है। इस बड़े दावे से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, जॉर्डन, मिस्र, तुर्किए और बहरीन सहित पश्चिम एशिया के तमाम प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर लंबी चर्चा की। इसके बाद उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी अलग से बात की। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत में एक साझा फॉर्मूला तैयार हुआ है जिसके तहत दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति को खत्म करने का प्रयास किया जाएगा। समझौते की शर्तों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए धीरे-धीरे खोला जा सकता है, ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी में ढील दी जा सकती है और विदेशी बैंकों में फ्रीज पड़ी ईरान की संपत्तियों को भी रिलीज किया जा सकता है। हालांकि, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, एनरिच्ड यूरेनियम और होर्मुज पर वास्तविक नियंत्रण जैसे सबसे जटिल मुद्दे अब भी पूरी तरह अनसुलझे हैं। शांति समझौते की इस सकारात्मक बातचीत के बीच ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान के नक्शे के ऊपर अमेरिकी झंडा लगी एक तस्वीर पोस्ट कर दी, जिसके साथ उन्होंने लिखा यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ मिडिल ईस्ट? इस पोस्ट को कूटनीतिक हलकों में ईरान के लिए एक सीधी राजनीतिक चेतावनी और मध्य पूर्व पर अमेरिकी प्रभुत्व दिखाने की कोशिश माना गया, जिससे अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया। ट्रंप के इस कदम पर ईरान ने भी बेहद आक्रामक और तीखा पलटवार किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्राचीन रोमन साम्राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि रोम कभी खुद को दुनिया का केंद्र समझता था, लेकिन प्राचीन ईरानियों (फारस) ने उनका यह भ्रम पूरी तरह तोड़ दिया था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में याद दिलाया कि जब रोमन सम्राट फारस के खिलाफ आगे बढ़े थे, तो उन्हें ईरान की शर्तों पर ही झुकना पड़ा था। ईरान के इस कड़े रुख से साफ है कि वह शांति समझौते के लिए तैयार तो है, लेकिन अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेकने को बिल्कुल राजी नहीं है। वीरेंद्र/ईएमएस/24मई 2026