क्षेत्रीय
24-May-2026
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- नये श्रम कानूनों के साथ होगा वेतन समझौता कोरबा (ईएमएस)। सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया अंतर्गत लाखों श्रमिकों के लिए इस बार वेतन समझौता नये श्रम कानूनों के बीच होने जा रहा है, कोयला मजदूरों का नया वेतन समझौता एक जुलाई 2026 से लागू होना है, लेकिन इसके लिए बनने वाली द्विपक्षीय कमेटी (जेबीसीसीआई) का अब तक गठन नहीं हुआ है, यही कमेटी बैठकों के बाद मजदूरों के वेतन बढ़ोतरी पर फैसला करती है। इसी बीच, कोल इंडिया प्रबंधन नये औद्योगिक संबंध संहिता-2020 को लागू करने की तैयारी में तेजी से जुटा है। केंद्र सरकार ने 8 मई 2026 को इसके नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद कोल इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों में ट्रेड यूनियनों की मान्यता की प्रक्रिया तेज हो गयी है। प्रबंधन ने सभी कोयला कंपनियों के मानव संसाधन विभाग को जून 2026 तक यूनियनों की मान्यता प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। नये नियम के तहत अब यूनियनों की मान्यता कर्मचारियों के गुप्त मतदान (सीक्रेट बैलेट) से तय होगी। इससे 1952 से चली आ रही सदस्य संख्या के आधार पर मान्यता पाने की पुरानी व्यवस्था खत्म होने की संभावना है। कोल इंडिया लिमिटेड में केंद्र सरकार के चार नये श्रम कानूनों को लागू करने और इसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए इंटरनल कमेटी बनायी गयी थी। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेड यूनियनों की मान्यता सीक्रेट बैलेट वोटिंग से तय होगी। कोल इंडिया मजदूर यूनियनों के साथ मिलकर वार्ताकार काउंसिल का गठन करेगी। बैलेट के आधार पर हुई वोटिंग में 51 फीसदी से अधिक मत लाने वाले को मुख्य वार्ताकार यूनियन बनाया जायेगा। अब यूनियनों की ताकत और मान्यता का फैसला कर्मचारियों द्वारा किये जाने वाले गुप्त मतदान से होगा। यदि किसी भी एक यूनियन को 51 फीसदी वोट नहीं मिलते हैं, तो जिन यूनियनों को कम से कम 20 फीसदी वोट मिले हैं, उन्हें मिलाकर एक ‘नेगोशिएटिंग काउंसिल’ (वार्ता परिषद) बनायी जायेगी, वहीं 20 प्रतिशत से कम वोट पाने वाले यूनियनों को पांच वर्षों तक मान्यता नहीं मिलेगी। किसी भी यूनियन को कम से कम पांच अनुषंगी कंपनियों में 20 प्रतिशत वोट हासिल करना अनिवार्य होगा। कोल इंडिया स्तर के लिए बनने वाली कमेटी में बैठने के लिए मजदूर यूनियनों को किसी भी पांच कोयला कंपनियों में 20 फीसदी से अधिक मत लाना होगा। कमेटी ने सिफारिश की है कि नये वेतन समझौते शुरू होने से पहले यूनियनों के प्रतिनिधित्व का यह विवाद सुलझा लिया जाये। नये नियमों के तहत फिक्स्ड टर्म वाले कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों की तरह आनुपातिक रूप से सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य लाभ देने की अनुशंसा है। यह लाभ केवल एक साल की सेवा के बाद मिल पायेगा। - 24 मई