- भारत में उपयोग दर 25 फीसदी पर, अब हस्ताक्षर से ज्यादा लागू करने पर हो ध्यान नई दिल्ली (ईएमएस)। विशेषज्ञों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के मोर्चे पर भारत की अगली प्राथमिकता उनके व्यावहारिक कार्यान्वयन और निर्यातकों को इनका इस्तेमाल सिखाने की होनी चाहिए। कई बड़े एफटीए पर हस्ताक्षर के बावजूद, असली चुनौती उनका सही उपयोग सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार और उद्योग को अब एफटीए पर हस्ताक्षर से एफटीए के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। वर्तमान में भारत में एफटीए की उपयोग दर लगभग 25 प्रतिशत है, जो विकसित देशों के 70-80 प्रतिशत से काफी कम है, जिससे भारतीय निर्यातक पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे। एक कंसल्टिंग फर्म ने कहा कि एफटीए के लाभ सीमा शुल्क स्तर पर इस्तेमाल हों और निर्यात बढ़ाएं। भारत ने अनेक महत्वपूर्ण बाजारों से करार किए हैं, जो वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में नए व्यापारिक रास्ते खोल सकते हैं। विशेषज्ञों ने कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग, फार्मा जैसे क्षेत्रों को उत्पादन से जुड़ी (पीएलआई) जैसी योजनाओं का अतिरिक्त समर्थन तथा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता व हरित नियमों (विशेषकर यूरोपीय बाजारों के लिए) के अनुरूप घरेलू प्रमाणन प्रणाली मजबूत करने का सुझाव दिया है। सतीश मोरे/24मई ---