क्षेत्रीय
24-May-2026
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- वर्ल्ड थायराइड डे पर मेदांता हॉस्पिटल इंदौर के विशेषज्ञ डॉ. राहुल चऊदा ने दूर किए बीमारी से जुड़े 12 बड़े मिथक इंदौर (ईएमएस)। हर साल 25 मई को दुनिया भर में वर्ल्ड थायराइड डे (विश्व थायराइड दिवस) मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को थायराइड स्वास्थ्य और इससे जुड़ी व्याधियों के प्रति सचेत करना है। आज थायराइड विकार विश्व भर में सबसे तेजी से बढ़ने वाले हार्मोनल रोगों में शुमार हैं, जो हर उम्र के लाखों लोगों को अपनी जद में ले रहे हैं। इसके बावजूद, समाज में आज भी इस बीमारी को लेकर कई तरह के भ्रम, खौफ और गलतफहमियां पैठी हुई हैं। जागरूकता के इसी अभाव में अक्सर लोग सही समय पर रोग की पहचान और सटीक उपचार से वंचित रह जाते हैं। बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि हम थायराइड से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को समझें। मेदांता हॉस्पिटल इंदौर के एंडोक्रिनोलॉजी और डायबिटीज कंसल्टेंट डॉ. राहुल चऊदा ने यहाँ थायराइड से जुड़े कुछ ऐसे ही बड़े मिथकों और उनके पीछे के सच को उजागर किया है। - क्या है थायराइड और क्यों है यह जरूरी? थायराइड हमारी गर्दन के ठीक सामने स्थित तितली के आकार की एक अत्यंत सूक्ष्म ग्रंथि होती है। यह शरीर में टी-3 और टी-4 नामक दो बेहद महत्वपूर्ण हार्मोन का निर्माण करती है। ये हार्मोन हमारे मेटाबॉलिज्म (चयापचय), शरीर के तापमान, हृदय की धड़कन, आंतरिक ऊर्जा, पाचन क्रिया, महिलाओं के मासिक धर्म चक्र, शारीरिक विकास और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करते हैं। इस हार्मोन के उत्पादन में थोड़ा सा भी असंतुलन पूरे शरीर की व्यवस्था को बिगाड़ सकता है। प्रमुख थायराइड विकारों में हाइपोथायरायडिज्म, हाइपरथायरायडिज्म, घेंघा (गोइटर), थायराइड नोड्यूल और थायराइड कैंसर शामिल हैं। - थायराइड : मिथक बनाम हकीकत मिथक 1 : यह समस्या केवल ढलती उम्र की महिलाओं को होती है। तथ्य : यह रोग किसी भी उम्र, लिंग या वर्ग के व्यक्ति को निशाना बना सकता है। पुरुष, महिलाएँ, नवजात शिशु, किशोर और बुजुर्ग सभी इसके दायरे में आते हैं। कई बच्चों में तो यह विकार जन्मजात (कॉन्जेनिटल हाइपोथायरायडिज्म) भी पाया जाता है। मिथक 2 : बीमारी के लक्षण हमेशा साफ और स्पष्ट दिखाई देते हैं। तथ्य: अक्सर इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें तनाव, उम्र का बढ़ना या खराब जीवनशैली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, मूड स्विंग्स, बाल झड़ना, वजन का अचानक घटना-बढ़ना और अनियमित पीरियड्स इसके धीमे लक्षण हैं, जिनकी पहचान में वर्षों लग जाते हैं। मिथक 3 : हर थायराइड रोगी की गर्दन में सूजन का दिखना लाजमी है। तथ्य : आज के दौर में आयोडीन युक्त नमक के नियमित इस्तेमाल और बेहतर खान-पान के चलते अधिकांश थायराइड मरीजों में बाहर से कोई सूजन या घेंघा रोग नहीं दिखाई देता। मिथक 4 : सिर्फ खान-पान में बदलाव या घरेलू नुस्खों से हाइपोथायरायडिज्म ठीक हो सकता है। तथ्य : संतुलित आहार स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, लेकिन हाइपोथायरायडिज्म के मरीजों के शरीर में हार्मोन की कमी को पूरा करने के लिए लेवोथायरोक्सिन जैसी चिकित्सकीय दवाओं की अनिवार्य आवश्यकता होती है। केवल डाइट से इसे ठीक नहीं किया जा सकता। मिथक 5 : पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली या सोयाबीन खाने से यह बीमारी होती है। तथ्य : यह पूरी तरह भ्रामक है। ये सभी सब्जियां सेहत के लिए फायदेमंद हैं। सीमित और सामान्य मात्रा में सेवन करने पर ये थायराइड के मरीजों को कोई नुकसान नहीं पहुँचातीं। इन्हें भोजन से पूरी तरह हटाने की कोई जरूरत नहीं है। मिथक 6 : टीएसएच रिपोर्ट नॉर्मल आते ही दवा बंद कर देनी चाहिए। तथ्य : रिपोर्ट सामान्य आने का मतलब ही यह है कि दवा अपना काम सही कर रही है। डॉक्टर के परामर्श के बिना दवा रोकने से हार्मोन का संतुलन दोबारा बिगड़ सकता है और कई मामलों में यह दवा जीवनभर लेनी पड़ती है। मिथक 7 : हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित व्यक्ति कभी वजन कम नहीं कर सकता। तथ्य : जैसे ही दवा की मदद से हार्मोन का स्तर नियंत्रित होता है, मरीज सही खान-पान और नियमित व्यायाम के जरिए बहुत ही आसानी से अपना वजन घटा सकते हैं। मिथक 8 : इलाज शुरू होते ही तेजी से वजन घटने लगता है। तथ्य : दवा शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारू करती है, जिससे ऊर्जा बढ़ती है। लेकिन सिर्फ दवा के भरोसे वजन कम नहीं होता, इसके लिए कैलोरी नियंत्रण और शारीरिक श्रम भी आवश्यक है। मिथक 9 : इस बीमारी से ग्रसित महिलाएँ कभी मां नहीं बन सकतीं। तथ्य : यदि चिकित्सक की निगरानी में सही उपचार और नियमित जांच जारी रहे, तो थायराइड से पीड़ित महिलाएँ भी पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित गर्भावस्था का सुख पा सकती हैं। मिथक 10 : गर्भावस्था के दौरान बच्चे की सुरक्षा के लिए दवा बंद कर देनी चाहिए। तथ्य : गर्भकाल में थायराइड का इलाज और भी संवेदनशील हो जाता है। मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए सही हार्मोन स्तर जरूरी है। दवा बंद करने से गर्भपात, प्रीक्लेम्प्सिया या समय से पहले प्रसव का जोखिम बढ़ जाता है। मिथक 11 : गर्दन की हर गांठ या थायराइड नोड्यूल कैंसर ही होती है। तथ्य : अधिकांश थायराइड नोड्यूल्स पूरी तरह सामान्य और गैर-कैंसरयुक्त (बिनाइन) होते हैं। केवल बेहद कम मामलों में ये कैंसर में तब्दील होते हैं। फिर भी, निगलने या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। मिथक 12 : थायराइड की हर सूजन या घेंघे का एकमात्र इलाज ऑपरेशन है। तथ्य : हर मामले में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। ऑपरेशन का फैसला केवल तब लिया जाता है जब घेंघा सांस की नली को दबा रहा हो, निगलने में बाधा बने, कैंसर की पुष्टि हो या सौंदर्य के लिहाज से समस्या पैदा कर रहा हो। :: सही जानकारी ही है सेहत की कुंजी :: डॉ. राहुल चऊदा के अनुसार, थायराइड रोग बेशक आम हैं, लेकिन सही समय पर पहचान और विशेषज्ञ की सलाह से इन्हें पूरी तरह नियंत्रित कर सामान्य जीवन जिया जा सकता है। इस वर्ल्ड थायराइड डे पर आवश्यकता इस बात की है कि समाज सोशल मीडिया की भ्रामक सूचनाओं और डर के जाल से बाहर निकले। याद रखें, जागरूकता ही शीघ्र उपचार और आरोग्य का एकमात्र मार्ग है। प्रकाश/24 मई 2026