राज्य
24-May-2026
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:: मुख्य सचिव ने ली कलेक्टर्स-कमिशनर्स की आपात बैठक, पानी के टैंकरों की होगी सख्त निगरानी, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1500 करोड़ रू. जारी :: इंदौर (ईएमएस)। प्रदेश में गहराते जल संकट और भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े रुख के बाद राज्य शासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जनता को पानी के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए सरकार ने नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई और जल निगम समेत पेयजल प्रदाय व्यवस्था से जुड़े समस्त अमले की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब केवल बेहद असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों में ही कर्मचारियों को अवकाश मिल सकेगा। मुख्यमंत्री के स्पष्ट संदेश के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी कलेक्टर्स, कमिश्रर्स और विभागीय आला अधिकारियों की आपात बैठक ली। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स को दोटूक निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में सेंट्रल कंट्रोल रूम स्थापित कर स्वयं उसकी कमान संभालें और अधिकारियों की विशेष समिति बनाकर प्रतिदिन पेयजल उपलब्धता की समीक्षा करें। :: टैंकरों के सिंडिकेट पर कड़ा पहरा, मनमानी पर होगी कार्रवाई :: मुख्य सचिव ने साफ किया कि पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। परिवहन में लगे पानी के टैंकरों की सख्त निगरानी की जाएगी और यदि कहीं भी पानी के दुरुपयोग, कालाबाजारी या अनियमितता की शिकायत मिली, तो संबंधितों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई होगी। उन्होंने अफसरों से कहा कि वे युद्ध स्तर पर काम करते हुए शहरी क्षेत्रों की पानी की टंकियों को भरने में समानता रखें ताकि हर इलाके को पर्याप्त पानी मिले। इस पूरे एक्शन प्लान में ऊर्जा विभाग को भी जोड़ा गया है ताकि बिजली कटौती के कारण जलापूर्ति बाधित न हो। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेयजल संकट के दौर में किसी भी नलजल योजना का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। :: संकट से निपटने के लिए खुले सरकारी खजाने के द्वार :: पेयजल किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों को राहत देने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। मुख्य सचिव ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में नए बोरवेल खनन और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए 1500 करोड़ रूपये की भारी-भरकम राशि जारी कर दी गई है। इसके साथ ही पंचायतों को पुरानी नलजल योजनाओं के संधारण (मेंटेनेंस) के लिए 55 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि दी गई है। नई एसओपी के तहत अब 10 हजार रूपये तक के जल संधारण कार्य पंचायतें अपने स्तर पर स्वयं करवा सकेंगी, जिसके लिए वे 15वें-16वें वित्त आयोग और अपनी स्वयं की आय के स्रोतों का उपयोग कर सकती हैं। :: सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर सुपरफास्ट एक्शन :: बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे जल स्रोतों के कम होते जलस्तर पर पहले से नजर रखें और वैकल्पिक स्रोतों का खाका तैयार रखें। मुख्य सचिव ने कड़े लहजे में कहा कि सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी के तहत पानी से जुड़ी जो भी शिकायतें आ रही हैं, उनका न्यूनतम समय में निपटारा किया जाए और इसकी जानकारी आमजन तक भी पहुंचाई जाए। :: जल संवर्धन अभियान को जन-आंदोलन बनाने की तैयारी :: अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बैठक में बताया कि 25 मई से प्रदेश में दो दिवसीय गंगा दशहरा के तहत जल गंगा संवर्धन अभियान के विशेष आयोजन शुरू हो रहे हैं, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उज्जैन के क्षिप्रा तट पर शामिल होंगे। उन्होंने कलेक्टर्स से इन आयोजनों को केवल औपचारिकता न रखते हुए जल संरक्षण और जनोपयोगी गतिविधियों से जोड़ने की बात कही। :: इंदौर में कंट्रोल रूम तैयार, टैंकरों से होगी सप्लाई :: इस महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इंदौर से संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन शामिल हुए। इंदौर की स्थिति साझा करते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने आश्वस्त किया कि जिले में सुचारू जल प्रदाय के लिए सेंट्रल कंट्रोल रूम स्थापित कर चौबीसों घंटे मॉनीटरिंग की जा रही है। शहर और ग्रामीण इलाकों के प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक जल वितरण की मुकम्मल व्यवस्था की गई है और जनता से मिलने वाली हर शिकायत का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया जा रहा है। प्रकाश/24 मई 2025