कोलकाता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में फाल्टा उपचुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। फाल्टा सीट पर भाजपा की बड़ी जीत के बाद अब राज्य की राजनीति में दल बदल और नेताओं की एंट्री को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी अब तृणमूल कांग्रेस से आने वाले नेताओं को आसानी से शामिल करने के पक्ष में नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी कोई “धर्मशाला” नहीं है, जहां कोई भी चुनाव हारने या राजनीतिक फायदा देखकर आ जाए। फाल्टा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। चुनाव आयोग ने पहले मतदान में गड़बड़ी और ईवीएम से जुड़ी शिकायतों के बाद दोबारा मतदान कराया था। तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव से दूरी बनाने और मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच भाजपा अब संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस लगातार भाजपा पर राजनीतिक दबाव और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगा रही है। फाल्टा उपचुनाव के बाद बंगाल की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। सुबोध/२४-०५-२०२६