- सिमलीपाल वन्यजीव संरक्षण का गौरवशाली क्षण अनुगुल (ईएमएस)। ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद खबर आई है। साल 2024 में महाराष्ट्र के तडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से विस्थापित (ट्रांसलोकेट) कर लाई गई तीन वर्षीय बाघिन जीनत ने चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। सूबे के वन मंत्री गणेश राम सिंहखूंटिया ने इस बड़ी कामयाबी की घोषणा करते हुए बताया कि जीनत ने करीब 20 दिन पहले इन शावकों को जन्म दिया था। वर्तमान में मां और चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं और वन विभाग हाई-टेक जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम से उन पर चौबीसों घंटे नजर रख रहा है। बाघिन जीनत का इतिहास बेहद रोमांचक रहा है। नवंबर 2024 में सिमलीपाल लाए जाने के कुछ दिन बाद ही वह रिजर्व से बाहर निकल गई थी और ओडिशा, झारखंड व पश्चिम बंगाल की सीमाओं को पार करते हुए करीब 300 किलोमीटर दूर चली गई थी। 21 दिनों के कड़े सर्च ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया गया और अप्रैल 2025 में दोबारा सिमलीपाल के कोर एरिया में छोड़ा गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी.के. झा ने इसे अंतर-राज्यीय बाघ स्थानांतरण परियोजना की बड़ी वैज्ञानिक सफलता बताया है, जिससे बाघों की अनुवांशिक विविधता बढ़ेगी। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वन विभाग की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह गौरवशाली क्षण साबित करता है कि सिमलीपाल में वन्यजीवों के लिए अनुकूल और सुरक्षित पर्यावास मौजूद है। - ईएमएस 03 जून 2026