अंतर्राष्ट्रीय
07-Jun-2026
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अस्पतालों में बेड पड़े कम, दवाओं का भी टोटा ढाका(ईएमएस)। बांग्लादेश में खसरे का संकट लगातार गहराता जा रहा है और हालात हर गुजरते दिन के साथ गंभीर होते जा रहे हैं। पिछले 24 घंटों के भीतर ही इस बीमारी के कारण 5 और बच्चों ने दम तोड़ दिया है। इसके साथ ही देश में खसरा या उससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर अब 613 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के मुताबिक, हाल ही में हुई इन मौतों को फिलहाल संदिग्ध खसरा मामलों के तौर पर दर्ज किया गया है। अब तक सामने आई कुल मौतों में से 522 मौतें संदिग्ध खसरा मामलों से जुड़ी हैं, जबकि 91 मौतों की आधिकारिक पुष्टि लैब जांच के जरिए की जा चुकी है। अस्पतालों में बढ़ते संक्रमण की रफ्तार प्रशासन और आम जनता की चिंताएं लगातार बढ़ा रही है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 915 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे देश में कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 77 हजार 791 तक पहुंच गई है। वहीं, इसी अवधि के दौरान 117 नए मामलों में खसरे की पूर्ण पुष्टि हुई है, जिससे कुल पुष्ट मरीजों की संख्या बढ़कर 9 हजार 620 हो गई है। इस साल 15 मार्च से लेकर अब तक खसरा जैसे लक्षणों वाले 63 हजार से ज्यादा बच्चों और मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है। राहत की बात यह है कि इनमें से करीब 59 हजार लोग इलाज के बाद ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद चिकित्सा केंद्रों पर दबाव कम नहीं हो रहा है। जमीनी स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई परिवार अपने बीमार बच्चों को लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने को मजबूर हैं ताकि उन्हें कहीं कोई खाली बिस्तर मिल जाए। राजधानी ढाका के बड़े अस्पतालों में भी जगह की भारी किल्लत देखी जा रही है। मरीजों की बेकाबू तादाद को देखते हुए चिकित्सालयों को लगातार नए वार्ड खोलने पड़ रहे हैं। शुरुआत में जहां खसरा मरीजों के लिए सिर्फ दो वार्ड बनाए गए थे, वहीं संख्या बढ़ने पर तीसरा और फिर चौथा वार्ड भी खोलना पड़ा। अब अस्पताल आईसीयू सुविधाओं के साथ चार विशेष वार्ड चला रहे हैं, लेकिन फिर भी बेड कम पड़ रहे हैं। अस्पतालों के स्टाफ का कहना है कि वार्ड हमेशा भरे रहते हैं और एक मरीज के डिस्चार्ज होते ही दूसरा तुरंत भर्ती हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक टीकाकरण और त्वरित इलाज ही इस संकट से निपटने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है। वीरेंद्र/ईएमएस/07जून2026