30 साल लड़ी कानूनी लड़ाई के बाद मिलेगा 10 लाख का मुआवजा चेन्नई(ईएमएस)। अभिनेता कमल हासन के साथ ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘इंडियन’ में काम कर चुकीं मशहूर अभिनेत्री आर. सुकन्या ने एक निजी टेलीविजन नेटवर्क के खिलाफ तीन दशक पुरानी मानहानि की कानूनी लड़ाई जीत ली है। मद्रास उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए संबंधित टीवी नेटवर्क को आदेश दिया है कि वह अभिनेत्री को मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपये का भुगतान करे। यह पूरा मामला साल 1996 का है और इसका सीधा संबंध कुख्यात चंदन तस्कर व डकैत वीरप्पन से जुड़ा हुआ है। दरअसल, वर्ष 1996 में इस टीवी नेटवर्क ने पत्रकार नक्कीरन आर. गोपाल द्वारा जंगल में लिए गए वीरप्पन के एक इंटरव्यू का प्रसारण किया था। इस इंटरव्यू के दौरान डकैत वीरप्पन ने अभिनेत्री सुकन्या को लेकर बेहद आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की थीं, जिन्हें चैनल ने बिना किसी कांट-छांट या संपादन (एडिट) के सीधे प्रसारित कर दिया था। सुकन्या ने आरोप लगाया था कि चैनल ने उनकी छवि को धूमिल करने और उन्हें अपमानित करने के उद्देश्य से जानबूझकर इस आपत्तिजनक हिस्से को नहीं हटाया। इसके बाद उन्होंने 1996 में ही मद्रास उच्च न्यायालय में टीवी नेटवर्क, पत्रकार गोपाल और वीरप्पन के खिलाफ 10 लाख रुपये के हर्जाने का सिविल मुकदमा दायर किया था। बाद में इस मामले को सिटी सिविल कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान टीवी नेटवर्क ने दलील दी थी कि उनका इरादा किसी को बदनाम करने का नहीं था, बल्कि पत्रकार ही उनके पास वह फुटेज लेकर आए थे। दूसरी ओर, पत्रकार गोपाल ने अदालत को बताया कि अनुबंध के अनुसार चैनल के पास पूरे इंटरव्यू को संपादित करने, काटने या किसी भी हिस्से को हटाने का पूरा अधिकार था। उन्होंने चैनल को 9 घंटे की फुटेज सौंपी थी, जिसमें से चैनल ने केवल 4 घंटे का हिस्सा ही प्रसारित किया था। साल 2015 में सिटी सिविल कोर्ट ने सुकन्या के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ टीवी नेटवर्क ने उच्च न्यायालय में अपील की थी। अब मद्रास उच्च न्यायालय के जस्टिस के. कुमारेश बाबू ने चैनल की याचिका को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि चैनल के खिलाफ दुर्भावना का आरोप साबित होता है। अदालत ने टिप्पणी की कि सुकन्या द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद चैनल ने एक तमिल पत्रिका में तो खेद व्यक्त किया था, लेकिन अपने स्वयं के चैनल पर कोई माफीनामा नहीं चलाया। अदालत ने साफ किया कि जब चैनल के पास सामग्री को संशोधित करने का अनियंत्रित अधिकार था, तो बिना जांचे-परखे ऐसी अपमानजनक टिप्पणी दिखाना उनकी लापरवाही और दुर्भावना को दर्शाता है। इस फैसले के बाद सुकन्या को 30 साल बाद न्याय मिला है। वीरेंद्र/ईएमएस/08जून2026