अंतर्राष्ट्रीय
09-Jun-2026
...


आसमान से बरसा सकता है कहर बीजिंग(ईएमएस)। आसमान में महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की जंग लगातार तेज हो रही है, और इस रेस में चीन का सबसे आधुनिक और भारी स्टील्थ फाइटर जेट जे-20 माइटी ड्रैगन इस समय दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की सबसे बड़ी यूएसपी और अनोखी पहचान इसके मुख्य पंखों के आगे लगे दो बेहद छोटे-छोटे पंख हैं, जिन्हें विमानन तकनीक की भाषा में कैनार्ड्स कहा जाता है। आमतौर पर रडार की नजरों से पूरी तरह गायब रहने वाले 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों में इन अतिरिक्त गतिशील पंखों को लगाने से बचा जाता है, लेकिन चीन ने एक बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत जे-20 में इस अनूठे डिजाइन को उतारा है। यही वह तकनीक है जो इस भारी-भरकम और विशालकाय लड़ाकू विमान को आसमान में एक हल्के लड़ाकू विमान जैसी अकल्पनीय फुर्ती और रफ्तार प्रदान करती है। जब बात आमने-सामने की हवाई लड़ाई यानी डॉगफाइट की आती है, तो जे-20 के ये आगे वाले छोटे पंख युद्ध का पासा पलटने का दम रखते हैं। हवा के प्रचंड दबाव को चीरते हुए ये कैनार्ड्स विमान के अगले हिस्से को पलक झपकते ही किसी भी दिशा में मोड़ने की आजादी देते हैं। इसके दम पर जे-20 दुश्मन के लड़ाकू विमानों की पोजीशन को भांपकर हवा में ऐसी खतरनाक कलाबाजियां दिखा सकता है कि विरोधी पायलट का सटीक निशाना भी चूक जाए। इतना ही नहीं, आधुनिक युद्ध क्षेत्र में जब दुश्मन की कोई खतरनाक गाइडेड मिसाइल जे-20 की तरफ बढ़ती है, तो ये छोटे पंख जेट को अत्यधिक जी-फोर्स को सहते हुए अचानक से रास्ता बदलने में मदद करते हैं, जिससे विरोधी मिसाइल हवा में ही दिशाभ्रमित होकर नाकाम हो जाती है। एविएशन इंजीनियरिंग के नजरिए से देखा जाए तो चीन ने जे-20 में कैनार्ड्स लगाकर एक बहुत बड़ा तकनीकी जुआ खेला है। अमरीकी रक्षा विशेषज्ञ हमेशा से यह मानते रहे हैं कि स्टील्थ विमानों में जितने ज्यादा गतिशील हिस्से या जोड़ होंगे, वे रडार की तरंगों को उतना ही ज्यादा परावर्तित करेंगे, जिससे विमान के पकड़े जाने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि अमेरिका के एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग जैसे विमानों में कभी भी कैनार्ड्स नहीं दिए गए, क्योंकि अमेरिका पूरी तरह से परफेक्ट स्टील्थ तकनीक चाहता था। इसके उलट, चीनी इंजीनियरों की सोच बिल्कुल अलग थी। चीन को प्रशांत महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी तक मार करने वाला एक ऐसा भारी विमान चाहिए था, जिसकी ईंधन क्षमता और हथियार ले जाने की क्षमता (पेलोड) लगभग 11 टन जितनी विशाल हो। इतने भारी विमान को अगर आसमान में फुर्तीला बनाए रखना था, तो पारंपरिक अमेरिकी डिजाइन काम नहीं आ सकती थी। इसलिए चीनी इंजीनियरों ने रडार से बचने की क्षमता यानी स्टील्थ से थोड़ा सा समझौता मंजूर किया, लेकिन जे-20 को कैनार्ड्स देकर सुपर-मैनुवरेबिलिटी (अत्यधिक फुर्ती) से लैस कर दिया। यह रणनीति साफ करती है कि चीन केवल लंबी दूरी से मिसाइल दागने में यकीन नहीं रखता, बल्कि वह नजदीकी हवाई लड़ाई की स्थिति में भी अमेरिकी और पश्चिमी देशों के विमानों को मार गिराने की पूरी तैयारी कर चुका है। वीरेंद्र/ईएमएस 09 जून 2026