क्षेत्रीय
09-Jun-2026
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- कमिश्नर को धरना स्थल तक बुलाया बिलासपुर (ईएमएस)। शहर में गहराते पेयजल संकट, दूषित पानी की आपूर्ति और अमृत मिशन की विफलता को लेकर सोमवार को जिला शहर कांग्रेस ने नगर निगम मुख्यालय के सामने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। हाथों में मटका, बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे सैकड़ों कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निगम प्रशासन, महापौर और सत्ताधारी नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने प्रतीकात्मक रूप से मटका फोडकऱ अपना आक्रोश जताया और महापौर पूजा विधानी के इस्तीफे की मांग कर दी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत कांग्रेस की असाधारण एकजुटता रही। मंच पर पूर्व विधायक शैलेश पांडे, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी, विजय पांडे, रामशरण यादव, राजेंद्र शुक्ल, निगम सभापति नसीरुद्दीन शेख, समीर अहमद बबला जावेद मेमन सहित संगठन के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एक साथ दिखाई दिए। लंबे समय बाद कांग्रेस का ऐसा संयुक्त और आक्रामक प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें जूनियर से लेकर सीनियर नेतृत्व एक ही स्वर में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ खड़ा नजर आया। जनता पानी खरीदकर पी रही, निगम संपत्तिकर में व्यस्तथोक विक्रेता और लिक्विडेटर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम अपनी मूल जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। शहर के कई वार्डों में या तो पानी पहुंच ही नहीं रहा या फिर दूषित और बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है। लोगों को मजबूरी में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है, जबकि टैंकरों से की जा रही आपूर्ति भी बेहद अव्यवस्थित और अपर्याप्त है। नेताओं ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर केवल कर वसूली में लगे हैं, लेकिन उन्हें यह तक नहीं पता कि शहर के किस वार्ड में पेयजल संकट किस स्तर पर पहुंच चुका है। कांग्रेस ने दावा किया कि नगर निगम क्षेत्र के अधिकांश वार्ड पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और आम नागरिक त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। अधिकारी यह पानी पीकर दिखाएं, देंगे 25 हजार प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने अपने साथ लाए गए दूषित पानी को दिखाते हुए निगम प्रशासन को खुली चुनौती दी। नेताओं ने कहा कि यदि कोई निगम अधिकारी या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस पानी को सार्वजनिक रूप से पीकर दिखा दे तो कांग्रेस तत्काल उसे 25 हजार रुपये का पुरस्कार देगी। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि जिस पानी को जानवर भी पीना पसंद नहीं करेंगे, वही पानी आज शहरवासियों को पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यही कारण है कि लोग बीमार पड़ रहे हैं और अस्पतालों के चक्कर लगाने को विवश हैं। कमिश्नर को बुलाने पर अड़े कांग्रेसी धरना-प्रदर्शन के दौरान निगम प्रशासन की ओर से उपायुक्त खाजाची कुम्हार ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन देने से साफ इनकार कर दिया। कांग्रेस का कहना था कि जब तक निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे स्वयं आकर जनता की बात नहीं सुनेंगे, तब तक ज्ञापन नहीं सौंपा जाएगा। करीब एक घंटे तक चले गतिरोध के बाद अंतत: आयुक्त प्रकाश सर्वे को धरना स्थल तक आना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपा और पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा। मेयर के इस्तीफे की मांग, विधायक भी निशाने पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने महापौर पूजा विधानी पर सीधा हमला बोला। नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर की जनता की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं रह गया है और नगर निगम केवल कागजों में काम कर रहा है। कांग्रेस ने कहा कि जब शहर को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, तब महापौर को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान नगर विधायक और सत्ताधारी दल के नेताओं के खिलाफ भी नारेबाजी हुई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जनता की बुनियादी समस्याओं को लेकर सरकार और उसके जनप्रतिनिधि पूरी तरह संवेदनहीन हो चुके हैं। यह सिर्फ शुरुआत है, अब सदन तक लड़ाई पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने कहा कि बिलासपुर में पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है, लेकिन नगर निगम और सरकार स्थिति को गंभीरता से लेने के बजाय दावे और विज्ञापनबाजी में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि अमृत मिशन के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन आज लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी ने कहा कि कांग्रेस जनता की इस लड़ाई को सडक़ से लेकर सदन तक लड़ेगी। यदि एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था नहीं सुधरी तो नगर निगम का घेराव और व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा ने कहा कि यदि नगर निगम साफ पानी तक उपलब्ध नहीं करा सकता तो जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। जनता की आवाज अब और दबने वाली नहीं है। मनोज राज 09 जून 2026