- 22 महीने बाद भी न नौकरी मिली न रकम लौटी, शिक्षक दंपती पर एफआईआर दर्ज बिलासपुर (ईएमएस)। शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड-3 की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 9 लाख रुपए की कथित ठगी का मामला सामने आया है। कोटा थाना क्षेत्र के ग्राम नेवरा निवासी एक किसान की शिकायत पर पुलिस ने जगदलपुर निवासी शिक्षक दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार ग्राम नेवरा निवासी बिहारी टोडर ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनकी पहचान जगदलपुर के धरमपुरा नंबर-1 निवासी खीर सिंधु हरपाल और उनकी पत्नी रेखा हरपाल से थी। दोनों पेशे से शिक्षक हैं। आरोप है कि उन्होंने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच होने का दावा करते हुए बिहारी टोडर के छोटे भाई को सहायक ग्रेड-3 के पद पर सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया था। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी दंपती ने नौकरी लगवाने के एवज में 10 लाख रुपए की मांग की थी। सौदा तय होने पर छह लाख रुपये पहले और नियुक्ति पत्र मिलने के बाद चार लाख रुपए देने की बात कही गई थी। पुराने परिचय और भरोसे के कारण उन्होंने आरोपियों की बातों पर विश्वास कर लिया। बैंक ट्रांसफर और नकद में दिए रुपए शिकायत में बताया गया है कि 8 जुलाई 2024 को ग्रामीण बैंक से एक लाख रुपए आरोपी के खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 11 जुलाई 2024 को तीन लाख रुपए नकद दिए गए। फिर 12 सितंबर 2024 को दो लाख रुपए बैंक खाते में भेजे गए। वहीं 24 नवंबर 2024 को जगदलपुर स्थित आरोपी के निवास पर तीन लाख रुपए नकद दिए गए। इस तरह कुल 9 लाख रुपए आरोपी दंपती को सौंपे गए। आरोपियों को देने ब्याज में लिए थे पैसे पीडि़त ने पुलिस को बताया कि रकम जुटाने के लिए उन्हें ब्याज पर पैसा लेना पड़ा, जबकि कुछ राशि रिश्तेदारों से उधार लेकर दी गई थी। आरोपियों ने चार महीने के भीतर नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कोई नियुक्ति नहीं हुई। बार-बार मांगने पर भी नहीं लौटाए पैसे शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो आरोपी दंपती ने यह कहकर टाल दिया कि विभागीय अधिकारी पूरी राशि मिलने के बाद ही नियुक्ति आदेश जारी करेंगे। बाद में नौकरी नहीं लगने पर भी पैसे लौटाने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन न तो रकम वापस की गई और न ही नौकरी दिलाई गई। पीडि़त के अनुसार करीब 22 महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। नोटिस का भी नहीं दिया जवाब इसके बाद उन्होंने 29 अप्रैल 2026 को अधिवक्ता के माध्यम से दोनों आरोपियों को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस 4 मई 2026 को प्राप्त हो गया था और 15 दिन के भीतर जवाब या भुगतान करने का समय दिया गया था, लेकिन आरोपियों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी खीर सिंधु हरपाल और रेखा हरपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। - 09 जून 2026