- क्राइम ब्रांच और मानवाधिकार आयोग की रडार पर दस्तावेज, जांच जारी भुवनेश्वर (ईएमएस)। ओडिशा के गृह विभाग में ओएसडी के पद पर तैनात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दयाल गंगवार से जुड़े मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मृत जीआरपी कांस्टेबल सौम्यरंजन स्वाईं को कथित तौर पर अपने निजी कार्यों में लगाए जाने संबंधी शिकायतों की गहराई से पड़ताल करने के लिए क्राइम ब्रांच ने अब रेलवे एवं तटीय सुरक्षा के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) से एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अब तक किसी भी जांच एजेंसी ने आईपीएस अधिकारी दयाल गंगवार को दोषी नहीं ठहराया है और यह पूरा मामला अभी पूरी तरह जांच के अधीन है। क्राइम ब्रांच ने संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर इन शिकायतों की सत्यता की जांच करने और उसकी रिपोर्ट मानवाधिकार संरक्षण प्रकोष्ठ के अतिरिक्त डीजी को सौंपने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांग चुका है। जानकारी के मुताबिक, कटक जिले के अड़शपुर के रहने वाले सौम्यरंजन स्वाईं साल 2013 में जीआरपी कांस्टेबल के रूप में पुलिस बल में शामिल हुए थे और वर्ष 2023 से वह दयाल गंगवार के अधीन अपनी सेवाएं दे रहे थे। सौम्यरंजन की दुखद मृत्यु के बाद उनके परिजनों की तरफ से कुछ गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिन्हें आधार बनाकर ही वर्तमान में जांच एजेंसियां इन दावों की जमीनी और तथ्यात्मक स्थिति को खंगाल रही हैं। पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि किसी भी लोक सेवक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना बेहद आवश्यक है, और जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी सिलसिले में विभागीय स्तर पर उपलब्ध सभी आवश्यक दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की बारीकी से समीक्षा की जा रही है। इसी कड़ी में बीते 4 जून को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक विशेष टीम कटक रेलवे एसपी कार्यालय पहुंची थी, जहां टीम ने मृत कांस्टेबल सौम्यरंजन की नियुक्ति, उनकी आधिकारिक तैनाती के स्थानों, कमांड सर्टिफिकेट और उससे जुड़े तमाम अभिलेखों की गहनता से पड़ताल की थी। वर्तमान में पुलिस मुख्यालय और संबंधित एजेंसियां लगातार रिपोर्ट एकत्र करने में जुटी हैं, और अब सभी की नजरें एनएचआरसी, क्राइम ब्रांच और एचआरपीसी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही इस मामले का सच सामने आ सकेगा। रामयश/ईएमएस 09 जून 2026