पीओके में मौजूदा अशांति की जड़ 2025 में हुआ ‘मुजफ्फराबाद समझौता’ है रावलकोट,(ईएमएस)। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हालात बेकाबू हो गए हैं। यहां एक प्रदर्शनकारी की शोकसभा में जुटे लोगों पर पाकिस्तानी सेना ने ताबड़तोड़ गोलिया बरसाईं। इस कार्रवाई में 27 लोगों की मौत हो गई है और 200 से ज्यादा घायल हो गए हैं। इलाके में 9 जून को बंद के ऐलान और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संगठन का दावा है कि रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और शोकसभा में शामिल लोगों पर लिए गए एक्शन में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है और कई लोगों के लापता होने का भी आरोप है। जेएएसी के मुताबिक यह शोकसभा शाहज़ैब हबीब नाम के एक प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार के लिए रखी गई थी। संगठन का आरोप है कि शाहज़ैब की मौत पाकिस्तान रेंजर्स की गोलीबारी में हुई थी उसके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे, तभी सुरक्षा बलों ने गोलिया चलानी शुरू कर दी और हालात हिंसक हो गए। जेएएसी के सीनियर लीडर शौकत नवाज मीर ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को अवामी एक्शन कमेटी के सदस्यों पर सीधे गोली चलाने के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि ऐसे आदेश हैं कि जेएएसी के मेंबर जहां भी दिखाई दें, उन पर सीधे फायरिंग की जाए। मीर ने पाकिस्तानी सेना पर आम नागरिकों और कश्मीरी जनता को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बता दें पीओके में मौजूदा अशांति की जड़ अक्टूबर 2025 में हुआ ‘मुजफ्फराबाद समझौता’ माना जा रहा है। यह समझौता पाकिस्तान सरकार, पीओके प्रशासन और जेएएसी के बीच पिछले साल हुए हिंसक आंदोलनों के बाद हुआ था। उस समय लगातार विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक संकट के बीच सरकार ने कई महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार करने का वादा किया था। उस समय इस समझौते को पीओके में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और राजनीतिक शिकायतों के समाधान की दिशा में एक बड़ी सफलता माना था। अब जेएएसी का आरोप है कि समझौते में किए गए अधिकांश वादे या तो पूरे नहीं किए गए हैं या फिर उन्हें आंशिक रूप से लागू किया गया है। इसी कारण संगठन ने 9 जून से पूरे क्षेत्र में हड़ताल और नए आंदोलन का आह्वान किया था। जेएएसी का कहना है कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार टालमटोल करती रही, जिससे लोगों में गुस्सा बढ़ता गया। हालांकि पाकिस्तान के अफसरों का दावा अलग है। उनका का कहना है कि जेएएसी की अधिकांश मांगों को पहले ही स्वीकार किया जा चुका है, लेकिन स्थानीय स्वायत्तता, आरक्षित विधानसभा सीटों, राजनीतिक विशेषाधिकारों और दीर्घकालिक सब्सिडी व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मुजफ्फराबाद समझौते को लेकर पैदा हुआ विवाद अब पीओके का बड़ा राजनीतिक संकट बन चुका है। क्षेत्र में शासन व्यवस्था, संसाधनों के बंटवारे, आर्थिक कठिनाइयों और अधिकारों को लेकर लंबे समय से असंतोष पनप रहा है। अब जब जेएएसी ने दोबारा आंदोलन छेड़ दिया है और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तब पूरे क्षेत्र में तनाव है। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता नहीं निकला तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है और मुजफ्फराबाद समझौते को पूरी तरह लागू करने की मांग आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। सिराज/ईएमएस 09जून26