09-Jun-2026
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- सरकारी नौकरी के नाम पर रकम ऐंठने वाले पिता-पुत्री गिरफ्तार - दिलाते थे फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और सैलरी बेंगलुरु (ईएमएस)। सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) की ऑर्गेनाइज्ड क्राइम स्क्वॉड (ईस्ट) ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये का बड़ा फर्जीवाड़ा करने वाले एक शातिर पिता-पुत्री को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने रेलवे और आयकर समेत विभिन्न विभागों में रोजगार का झांसा देकर 40 से अधिक बेरोजगार युवाओं से करीब 5.3 करोड़ रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। पकड़े गए ठगों की पहचान 48 वर्षीय शमशाद बेगम एमएम और उनके 78 वर्षीय बुजुर्ग पिता मंसूर अहमद एमएम के रूप में हुई है, जो मूल रूप से आरटी नगर के गंगानगर इलाके के निवासी हैं। इस पूरे महाघोटाले का भंडाफोड़ पिछले वर्ष नवंबर महीने में तब हुआ, जब विजयपुरा जिले के रहने वाले पीड़ित संगमेश राचैया वस्त्राद ने पुलिस में इस धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस तफ्तीश के अनुसार, दोनों आरोपी खुद को बेहद प्रभावशाली व्यक्ति बताते थे और लोगों को जाल में फंसाने के लिए दावा करते थे कि उनके देश के बड़े राजनेताओं और शीर्ष नौकरशाहों से बेहद करीबी ताल्लुकात हैं। वे अभ्यर्थियों को रेलवे, आयकर विभाग, सिंचाई, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग जैसे प्रतिष्ठित महकमों में सरकारी नौकरी पक्की कराने का भरोसा देते थे। जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह मुख्य रूप से उत्तर कर्नाटक के सीधे-साधे और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अपना आसान शिकार बनाता था। अभ्यर्थियों का पूर्ण विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने जालसाजी की सारी हदें पार करते हुए न केवल फर्जी नियुक्ति पत्र (जॉइनिंग लेटर) जारी किए, बल्कि बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में फर्जी प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) केंद्र भी खोल रखे थे। अपराध के इस अनूठे तौर-तरीके को लेकर पुलिस ने बताया कि पीड़ितों को कोई शक न हो, इसके लिए आरोपियों ने कुछ युवाओं को शुरुआती चार महीने तक अपनी जेब से फर्जी वेतन भी दिया। लेकिन जैसे ही बड़ी रकम हाथ आ गई, आरोपियों ने अचानक अपने मोबाइल बंद कर पीड़ितों से पूरी तरह संपर्क तोड़ लिया। मुख्य शिकायतकर्ता संगमेश वस्त्राद ने आरोप लगाया है कि उसने अकेले ही अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के बच्चों का भविष्य संवारने के नाम पर इस ठग गिरोह को किस्तों में कुल 2.5 करोड़ रुपये सौंपे थे। फिलहाल सेंट्रल क्राइम ब्रांच की टीम आरोपियों को रिमांड पर लेकर मामले की आगे की कड़ियों को खंगाल रही है, और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस बड़े अंतरराज्यीय गिरोह में और कौन-कौन से रसूखदार लोग या विभाग के कर्मचारी शामिल थे। - ईएमएस 09 जून 2026