राज्य
09-Jun-2026


* पीएम मोदी के ‘महिला नेतृत्व में विकास’ विजन को मिली नई गति, राज्य में 10 लाख संभावित लखपति दीदियों की पहचान * स्वयं सहायता समूहों, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल अहमदाबाद (ईएमएस)| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत 12 वर्षों में महिलाएं भारत की विकास यात्रा का एक अभिन्न हिस्सा बन गई हैं। प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, पीएम मुद्रा योजना, पीएम आवास योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान जैसी कई पहलों के जरिए ‘महिलाओं के नेतृत्व में विकास’ के विजन को लगातार आगे बढ़ाया है। इन सभी पहलों ने उद्यमशीलता, आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका के बेहतर अवसरों के माध्यम से नारी शक्ति को सशक्त बनाया है। इन पहलों में ‘लखपति दीदी योजना’ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उन्हें स्थायी आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करने, वित्तीय स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन देने के संदर्भ में एक मुख्य कदम के रूप में उभरी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गुजरात आजीविका संवर्धन कंपनी ने राज्य में 10 लाख संभावित लखपति दीदियों की पहचान की है, जिनमें से 5.96 लाख महिलाएं अब तक लखपति दीदियां बन चुकी हैं। यह उपलब्धि राज्यभर में महिला-केंद्रित विकास की बढ़ती शक्ति और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की सफलता को दर्शाती है। राज्य सरकार ने जिला एवं तहसील स्तर पर 124 मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति की है, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर के रिसोर्स पर्सन्स द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। इन मास्टर ट्रेनरों ने कृषि सखियों, पशु सखियों और बैंक सखियों सहित 10,000 से अधिक कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (सीआरपी) को प्रशिक्षण दिया है, जिससे इस योजना का जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन मजबूत हुआ है। क्या है लखपति दीदी योजना? लखपति दीदी योजना भारत सरकार की दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत महिलाओं द्वारा संचालित ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को समूह में संगठित करके उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, ऋण और बाजार तक पहुंच प्रदान कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में काम करने वाली ऐसी महिलाएं, जिनके परिवारों की सालाना आय 1 लाख रुपए से अधिक है, उन्हें लखपति दीदी के रूप में पहचाना जाता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण भारत में एसएचजी के माध्यम से इस योजना को क्रियान्वित कर रहा है। उल्लेखनीय है कि डीएवाई-एनआरएलएम संरचना के अंतर्गत गुजरात देश के सक्रिय राज्यों में से एक के तौर पर उभरा है। नवसारी के कलेक्टर ऑफिस में कैंटीन चलाने वाली भावना सालाना 10.16 लाख रुपए कमा रही हैं नवसारी जिले की चिखली तहसील के नोगामा गांव की भावना पटेल आज गुजरात की एक सफल लखपति दीदी बन गई हैं, जो आजीविका की अनेक गतिविधियों के जरिए सालाना लगभग 10.16 लाख रुपए कमा रही हैं। वे वर्ष 2014 से गायत्री सखी मंडल के साथ जुड़ी हुई हैं, जिससे उन्हें ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत आयोजित होने वाली बैठकों, वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न सरकारी योजनाओं और आजीविका के अवसरों के बारे में जानकारी मिली। मिशन मंगलम पहल से प्रेरित होकर और अपने स्वयं सहायता समूह- गायत्री सखी मंडल की सहायता से उन्होंने कैंटीन और कैटरिंग सर्विस का काम शुरू किया। आज, भावना नवसारी के कलेक्टर ऑफिस में एक कैंटीन चलाती हैं और सखी मंडल के अन्य सदस्यों के साथ कैटरिंग सेवाएं देती हैं। उनकी सालाना आय में कैंटीन के व्यवसाय से 2 लाख रुपए, कैटरिंग सेवाओं से 5 लाख रुपए, कृषि से 1 लाख रुपए और अन्य स्रोतों से 2.16 लाख रुपए शामिल हैं, जिससे उनकी कुल सालाना आय 10.16 लाख रुपए हो गई है। उन्होंने दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठाया है, जैसे लैपटॉप खरीदने के लिए जिला उद्योग केंद्र से ऋण और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आयुष्मान कार्ड। सखी मंडल से जुड़ने के कारण भावनाबेन के जीवन में आर्थिक स्थिरता आई है, उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है और उनका आत्मविश्वास बढ़ गया है। अब, लखपति दीदी के रूप में वे दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरणा दे रही हैं। खेड़ा जिले की शिल्पा पंड्या नेचुरल शरबत के व्यवसाय से सालाना 10 लाख रुपए की कमाई करती हैं खेड़ा जिले की महेदाबाद तहसील के नेनपुर गांव की शिल्पा पंड्या अपनी फूड प्रोसेसिंग इकाई के जरिए एक सफल लखपति दीदी बन गई हैं। वे मार्च 2010 से शिल्पा सखी मंडल से जुड़ी हुई हैं और अभी वे नेनपुर विलेज ऑर्गेनाइजेशन (वीओ) और क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) में इस सखी मंडल की अध्यक्ष के तौर पर सेवाएं दे रही हैं। अपने स्वयं सहायता समूह को रिवॉल्विंग फंड मिलने के बाद, शिल्पा ने पंचामृत, नींबू, स्ट्रॉबेरी और अमरूद जैसे फ्लेवर वाले बिना किसी रंग के नेचुरल शरबत बनाने का काम शुरू किया। रूरल सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आर-एसईटीआई) यानी ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थाओं से फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, उन्होंने अपने इस उद्यम का और विस्तार किया। आज, उनकी यह फूड प्रोसेसिंग इकाई न केवल उनके परिवार को आर्थिक स्थिरता देती है, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर भी पैदा करती है, और महिलाओं के नेतृत्व में आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान देती है। यह तो गुजरात की लखपति दीदियों के कुछ ही उदाहरण हैं। राज्यभर में ऐसी हजारों लखपति दीदियां हैं, जो लगातार प्रगति कर रही हैं, अधिक से अधिक आय अर्जित कर रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी पहल, यह लखपति दीदी योजना ग्रामीण स्तर पर परिवर्तन की एक सशक्त पहल बनकर उभरी है। यह योजना महिलाओं को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देने के लिए बढ़ावा देती है। सतीश/09 जून