राज्य
09-Jun-2026
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डोंबिवली, (ईएमएस)। लंबे समय से चले आ रहे पिंपलेश्वर महादेव मंदिर की भूमि संबंधी विवाद का आखिरकार समाधान हो गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यहां यह घोषणा करते हुए कहा कि राजस्व एवं उद्योग विभाग के सकारात्मक सहयोग से मंदिर की पूरी भूमि अब पिंपळेश्वर महादेव को समर्पित कर दी गई है। उन्होंने इसे महादेव भक्तों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि वर्षों से जारी संघर्ष का सफल अंत हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास की जीत है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आयोजित कार्यक्रम में राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत, सांसद डॉ.श्रीकांत शिंदे, विधायक रवींद्र चव्हाण, विधायक किसन कथोरे, विधायक कुमार आयलानी, विधायक सुलभा गायकवाड़, विधायक राजेश मोरे, पूर्व सांसद कपिल पाटिल, पूर्व कैबिनेट मंत्री जगन्नाथ पाटिल, जिला कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका आयुक्त अभिनव गोयल, पिंपलेश्वर मंदिर के ट्रस्टी और पंचक्रोशी से आए भक्त बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री द्वारा मंदिर में विधिवत महापूजा से हुई। इसके बाद भक्त मंडल की ओर से उनका भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। अपने सम्मान के जवाब में, मुख्यमंत्री ने हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज और भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को विनम्र श्रद्धांजलि दी और सभी का दिल से आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्य उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों के संयुक्त प्रयासों से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल माध्यम है, वास्तविक प्रेरणा और शक्ति भगवान महादेव की ही हैं। फडणवीस ने कहा, “जो कार्य होना होता है, वह महादेव स्वयं करवाते हैं। इस पुण्य कार्य को पूरा करने का अवसर हमें मिला, इसके लिए हम भगवान महादेव के प्रति कृतज्ञ हैं।”मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि पिंपलेश्वर महादेव मंदिर के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए सरकार विशेष विकास कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि पिंपलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है और राज्य सरकार इस धार्मिक धरोहर को उसके पुराने वैभव के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला और मंदिर भूमि विवाद के समाधान को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में पंढरीनाथ पाटिल ने लोगों का परिचय कराया और उनका स्वागत किया। इस मौके पर सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे और विधायक रविंद्र चव्हाण ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि मंदिर परिसर के विकास से संबंधित सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे और विधायक रविंद्र चव्हाण द्वारा रखी गई सभी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। संतोष झा- ०९ जून/२०२६/ईएमएस