राज्य
09-Jun-2026
...


:: इंदौर प्रेस क्लब में सोशियो मीडिया संवाद संपन्न; सोशल मीडिया और एआई के प्रभाव पर हुआ मंथन :: इंदौर (ईएमएस)। पश्चिमी देशों की पत्रकारिता पूरी तरह से डेटा पर आधारित होती है, जबकि भारतीय मीडिया में समाज, कला, संस्कृति और साहित्य सहित जीवन के कई अनूठे रंग समाहित हैं। विकसित देशों के लिए आज यूजर्स का डेटा एक बड़ी पूंजी के समान है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सभी बड़े आर्थिक और राजनीतिक फैसले इसी डेटा के विश्लेषण पर आधारित होते हैं। यही कारण है कि चीन जैसा महाशक्ति देश अपने नागरिकों के डेटा को कभी उजागर नहीं होने देता। हमारे देश में भी डेटा भविष्य में संप्रभुता की एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। यह विचार सूचना प्रसारण मंत्रालय के प्रिंसिपल एडवाइजर तथा सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड एंड होलिस्टिक स्टडीज नई दिल्ली के निदेशक के.ए. बदरीनाथ ने व्यक्त किए। वे मंगलवार को इंदौर प्रेस क्लब में मीडिया टेक्नोलॉजी, सिविलाइजेशन एंड पब्लिक डिसकोर्स विषय पर आयोजित सोशियो मीडिया संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। इस दौरान बदलते दौर में मीडिया के स्वरूप, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दखल पर गहरा वैचारिक मंथन हुआ। :: पारंपरिक मीडिया पर हावी हो रहा है सोशल मीडिया का ट्रेंड :: वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए श्री बदरीनाथ ने कहा कि कई देशों में सोशल मीडिया के जरिए चलाए गए नकारात्मक अभियानों ने पूरी व्यवस्था को प्रभावित किया है। स्थिति यह हो गई है कि सोशल मीडिया का कंटेंट अब मुख्यधारा के पारंपरिक मीडिया (प्रिंट और टीवी) को भी डिक्टेट करने लगा है। जो नैरेटिव या ट्रेंड सोशल मीडिया पर वायरल होता है, उसे अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाने का एक अदृश्य व्यावसायिक दबाव आज पारंपरिक मीडिया पर साफ देखा जा सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि बीते एक दशक में डिजिटल मीडिया ने भारत में जनमानस को गहराई से प्रभावित किया है और भविष्य की पत्रकारिता का पूरा ढांचा इसी डिजिटल तकनीक पर आधारित होगा। :: तकनीक के दौर में विश्वसनीयता की कसौटी; एक गलत खबर कर देगी जीरो : हेमंत उपाध्याय संवाद कार्यक्रम में वार्ताकार की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ पत्रकार हेमंत उपाध्याय ने वैचारिक विमर्श को आगे बढ़ाते हुए कहा कि तकनीक ने पत्रकारिता के माध्यम भले ही बदल दिए हों, लेकिन इसने जोखिम भी बढ़ा दिया है। अब खबरों पर आम जनता की प्रतिक्रियाएं त्वरित और व्यापक होती हैं। तकनीक के इस युग में विश्वसनीयता ही एकमात्र कसौटी है, क्योंकि यहाँ एक गलत खबर किसी को भी पल भर में हीरो से जीरो बना सकती है। वक्तव्य के उपरांत श्री बदरीनाथ ने कार्यक्रम में उपस्थित मीडियाकर्मियों और प्रबुद्ध जनों की विभिन्न तकनीकी व रणनीतिक जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। :: विमर्श में जुटे शहर के वरिष्ठ पत्रकार :: इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम, उपाध्यक्ष संजय त्रिपाठी, सचिव अभिषेक चेंडके, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवारी, अभय तिवारी, प्रमोद दीक्षित, मनीष मक्खर, श्याम कामले, विजय भट्ट, पूनम शर्मा और लक्ष्मीकांत पंडित ने अतिथियों को सूत की माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन महासचिव प्रदीप जोशी ने किया। इस अवसर पर मंच पर वरिष्ठ पत्रकार सुदेश तिवारी, कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुलभ सिंह और अश्विनी मिश्रा भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस गरिमामय वैचारिक विमर्श में वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्यागी, डॉ. अर्पण जैन, डॉ. कमल हेतावल, के.एल. जोशी, राहुल वावीकर, निजाम अली, ललित शर्मा, हेमंत शर्मा, महेन्द्र राठौर सहित बड़ी संख्या में शहर के पत्रकार, लेखक और मीडिया प्राध्यापक उपस्थित थे। प्रकाश/09 जून 2026