क्षेत्रीय
09-Jun-2026
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सुंदर मन भगवान को करें समर्पित, जीवन हो जाएगा धन्य-पंडित लाल शंकर मेहता - विवाह झांकी का जीवंत चित्रण किया गया। शाजापुर (ईएमएस)। अधिक मास के पावन पर्व पर पुलिस लाइन रोड स्थित राम मंदिर में चल रही संगीतमय राम कथा में राम विवाह उत्सव पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कथा के दौरान जैसे ही राम-जानकी की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई, पूरा पांडाल भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भावविभोर होकर नाचने-झूमने लगे। अधिक मास के कारण कथा श्रवण करने के लिए प्रतिदिन श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रीराम विवाह उत्सव के प्रसंग का वर्णन करते हुए नगर के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित लाल शंकर मेहता ने भगवान राम के दूल्हा रूप का अत्यंत सजीव और अलौकिक चित्रण किया। उन्होंने बताया कि जब भगवान राम दूल्हा बने, तो कामदेव स्वयं घोड़ा बनकर आए। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन भगवान शंकर ने अपने 15 नेत्रों से किए। ब्रह्मा जी अपने 8 नेत्रों से दर्शन कर गदगद हुए और अधिक नेत्र न होने पर पछताने लगे। वहीं, कार्तिकेय ने अपने 6 मुखों (12 नेत्रों) और देवराज इंद्र ने 1000 नेत्रों से भगवान के इस मनमोहक रूप को निहारा। इंद्राणी, सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती जैसी देवियां भी सुंदर स्त्रियों का रूप धरकर दूल्हा बने श्रीराम के दर्शन करने आईं और उन पर जमकर पुष्प वर्षा की। ईश्वर को अर्पित करें अपना सुमन व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को धर्म का मर्म समझाते हुए पंडित मेहता ने कहा कि पुष्प का एक नाम सु-मन भी है, जिसका अर्थ होता है सुंदर मन। भगवान को समर्पित करने के लिए संसार में सबसे उत्तम वस्तु हमारा सुंदर मन ही है। यदि हम अपना मन ईश्वर के श्रीचरणों में पूरी तरह समर्पित कर दें, तो यह जीवन स्वतः ही धन्य हो जाएगा। कथा की सम्पूर्ण राशि मंदिर निर्माण में होगी समर्पित कथा के दौरान कथावाचक पंडित लाल शंकर मेहता ने एक बेहद प्रेरक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने व्यासपीठ से कहा कि इस कथा आयोजन से प्राप्त होने वाली समस्त राशि राम मंदिर के निर्माण कार्य में समर्पित की जाएगी। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से विनम्रतापूर्वक आग्रह किया कि वे उन्हें दक्षिणा के रूप में कोई अन्य भेंट न दें, बल्कि केवल तुलसी पत्र और पुष्प ही प्रदान करने की कृपा करें। कथा के दौरान बड़ी संख्या में महिला और पुरूष मौजूद रहे।