09-Jun-2026
...


देवसर्रा प्लांट की पाइपलाइन बेकार, ऊंचाई के कारण नहीं पहुंच रहा पानी गंदा पानी का उपयोग करने से बढ़ रहा बीमारियों का खतरा बालाघाट (ईएमएस). जिले के ग्राम पंचायत बटुआ के ग्राम बरखेड़ा के वार्ड नंबर 17 में पानी का संकट भयावह रूप ले चुका है। हालात इतने बदतर हैं कि आदिवासी ग्रामीणों को 2 किलोमीटर दूर से गंदा और दूषित पानी लाकर पीना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार सिस्टम पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है। ग्राम बरखेड़ा के वार्ड क्रमांक 17 में रहने वाले आदिवासी परिवार आज भी बुनियादी सुविधा ‘पेयजल’ के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जल निगम के देवसर्रा प्लांट से पानी सप्लाई के लिए पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन ऊंचाई पर बसे इलाके में आज तक पानी नहीं पहुंच पाया। नतीजा—पूरी व्यवस्था सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई है। मजबूरी में ग्रामीणों को करीब 2 किलोमीटर दूर तालाब और नालों की झिरियों से गंदा, बदबूदार पानी लाना पड़ रहा है और उसी का उपयोग पीने में किया जा रहा है। इस दूषित पानी के कारण गांव में बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से वे ग्राम पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं। सवाल उठता है कि आखिर आदिवासी बहुल इस वार्ड की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है? स्थिति यह है कि एक ओर सरकार जल योजनाओं पर करोड़ों खर्च करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता में लेते हुए तत्काल हेडपंप स्थापित कराया जाए और पेयजल संकट से राहत दिलाई जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मानवीय संकट पर कब तक चुप्पी साधे रहता है।