किसानों के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता नरसिंहपुर (ईएमएस)।. उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ ने बताया कि खरीफ फसलों की आगामी बोनी को देखते हुए किसानों के लिए जिले में 20 हजार 805 मैट्रिक टन यूरिया, एक हजार 624 मैट्रिक टन डीएपी, 5 हजार 812 मैट्रिक टन एनपीकेएस, 602 मैट्रिक टन एमओपी और 13 हजार 437 मैट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) का भंडारण किया जा चुका है, जिसका वितरण का कार्य सतत जारी है। वर्तमान स्थिति में 8 हजार 408 मैट्रिक टन यूरिया, 3 हजार 744 मैट्रिक टन एनपीके, 363 मैट्रिक टन एमओपी और 10 हजार 483 मैट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) उपलब्ध है। जिले के किसानों के लिए यूरिया सहित अन्य उर्वरकों का पर्याप्त स्टाक मौजूद है। सहकारी समितियों एवं निजी विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को सतत वितरण किया जा रहा है। खरीफ फसल के लिए किसानों की मांग को दृष्टिगत रखते हुए निरंतर मॉनिटरिंग करते हुए भंडारण सुनिश्चित किया जा रहा है। खाद सोसायटीवार, मार्कफेड के डबल लाक केंद्रवार और निजी दुकानवार ई-विकास पोर्टल पर आनलाइन देखी जा सकती है। उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ ने बताया कि ई- विकास प्रणाली (ई-टोकन उर्वरक वितरण) अंतर्गत जिले में एक अप्रैल 2026 से 09 जून 2026 तक किसानों द्वारा रजिस्ट्रेशन कराकर 35 हजार 587 किसानों ने ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक क्रय किया गया है। जिले में सेवा सहकारी समितियों में यूरिया 3 हजार 798 मैट्रिक टन, एसएसपी एक हजार 310 मैट्रिक टन, एनपीके 450 मैट्रिक टन, मार्कफेड गोदामों में यूरिया एक हजार 530 मैट्रिक टन, एनपीके 2 हजार 347 मैट्रिक टन एवं निजी विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों में यूरिया एक हजार 191 मैट्रिक टन और एनपीके 227 मैट्रिक टन किसानों के लिए उपलब्ध है। उन्होंने जिले के सभी किसान से अनुरोध किया है कि वे अपनी फसल की आवश्यकतानुसार खाद को अपनी पसंद की सोसायटी या दुकान से ई-विकास पोर्टल के माध्यम से आसानी से बुक कर प्राप्त कर सकते हैं। इस पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली में राजस्व पट्टाधारी, वन पट्टाधारी, सिकमी किसान, शारीरिक रूप से अक्षम व वृद्ध किसान, मृतक किसान के स्वजन और धार्मिक संस्थान या ट्रस्ट की जमीन के लिए भी खाद उपलब्ध कराने की विशेष सुविधा दी गई है। किसान चाहें तो खरीफ फसलों के लिए अनुशंसित यूरिया, एसएसपी, एनपीके, डीएपी और पोटाश खाद की पूरी मात्रा एक बार में ही उठा सकते हैं। इसके अलावा यदि किसान चाहें तो अपनी मर्जी और आवश्यकता के अनुसार पोर्टल पर प्रक्रिया का पालन करते हुए सुविधानुसार दोबारा भी खाद की बुकिंग कर सकते हैं। प्रशासन की इस व्यवस्था से किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और बोनी का कार्य सुगमता से हो सकेगा। किसानों को परेशान होने की आवश्यनक नहीं है पर्याप्ता मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। ईएमएस/ राहुल वासनिक/ 09 जून 2026