राष्ट्रीय
02-Jan-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। भागदौड भरी जिंदगी में खुद को फिट और संतुलित रखने के लिए योग को दिनचर्या में शामिल करना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। योग के कई आसनों में वृश्चिकासन एक उन्नत लेकिन बेहद लाभकारी आसन है। इस आसन के अभ्यास में शरीर की आकृति बिच्छू जैसी बनती है और यही कारण है कि इसे वृश्चिकासन कहा गया है। योगा एक्सपर्टस के अनुसार, नियमित अभ्यास से यह आसन शरीर और मन दोनों को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाता है। वृश्चिकासन एक इनवर्टेड बैकबेंड योग मुद्रा है, जिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाकर शरीर को ऊपर उठाया जाता है और पैरों को धीरे-धीरे सिर की ओर मोड़ा जाता है। इस दौरान कंधे, बाजू, पीठ और कोर मसल्स पर गहरा असर पड़ता है, जिससे ये हिस्से मजबूत होते हैं। योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है, जिससे कमर दर्द और पीठ से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है। इसके साथ ही पेट की मांसपेशियों पर खिंचाव आने से पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी वृश्चिकासन बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह मस्तिष्क में रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे एकाग्रता, स्मरण शक्ति और फोकस में सुधार होता है। नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता कम होती है और आत्मविश्वास में वृद्धि महसूस की जाती है। इनवर्टेड पोजिशन के कारण हृदय की कार्यप्रणाली पर भी सकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि रक्त प्रवाह संतुलित रूप से पूरे शरीर में पहुंचता है। वृश्चिकासन का अभ्यास करते समय सही तकनीक बेहद जरूरी है। आमतौर पर इसे मयूरासन या फोरआर्म बैलेंस की स्थिति से शुरू किया जाता है। कोहनियों को कंधों के ठीक नीचे रखकर शरीर को ऊपर उठाया जाता है और फिर धीरे-धीरे पीठ को मोड़ते हुए पैरों को सिर की ओर लाया जाता है। शुरुआत में कुछ सेकंड तक रुकना पर्याप्त होता है और अभ्यास बढ़ने के साथ समय को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। आसन के बाद शवासन या बालासन में आराम करना जरूरी माना जाता है, ताकि शरीर सामान्य अवस्था में लौट सके। योग विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह भी देते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, चक्कर आने की समस्या, गर्भावस्था या पीठ-कमर में चोट वाले लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 02 जनवरी 2026