राष्ट्रीय
02-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में गेहूं का हर घर के रोजाना उपयोग होता है। देश के कई राज्य पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्य गेहूं के बड़े उत्पादक हैं, जहां इसकी कई किस्मों की खेती की जाती है। आकार में छोटा दिखने वाला यह अनाज पोषक तत्वों और फाइबर से भरपूर होता है। गेहूं न केवल शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देता है, बल्कि पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद में गेहूं को अमृत समान बताया गया है और इसे ऐसा अनाज माना गया है, जो तन और मन दोनों को शक्ति प्रदान करता है। आयुर्वेद के अनुसार गेहूं बलवर्धक होता है और शरीर में ओज बढ़ाने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और जल्दी भूख नहीं लगती। यही कारण है कि उत्तर भारत के अधिकांश घरों में दिन में तीनों समय गेहूं से बनी रोटियों का सेवन किया जाता है। हालांकि आयुर्वेद की दृष्टि से ऐसा करना सही नहीं माना जाता। हर समय गेहूं का सेवन पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है, जैसे गैस, अपच और भारीपन। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं से बनी रोटियों का सेवन दोपहर के समय करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय पाचन शक्ति सबसे अधिक सक्रिय रहती है, जिससे भारी भोजन आसानी से पच जाता है। सुबह और खासतौर पर रात के समय गेहूं से बनी रोटियों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। शाम होते-होते पाचन शक्ति की गति धीमी हो जाती है, ऐसे में भारी भोजन पचाने में शरीर को कठिनाई होती है। इसलिए रात के भोजन में हल्का और सुपाच्य आहार लेना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। गेहूं के सेवन के साथ-साथ इसके आटे की गुणवत्ता भी बेहद महत्वपूर्ण है। आटा ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए। जरूरत के अनुसार ही चक्की पर आटा पिसवाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक रखा आटा अपने पोषक तत्व खो देता है। रोटियां बनाते समय चोकर निकालना भी सही नहीं है। रोटियों के अलावा गेहूं के दलिए का सेवन भी एक अच्छा विकल्प है। मूंग की दाल के साथ बनाया गया गेहूं का दलिया फाइबर और प्रोटीन का संतुलित स्रोत माना जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। चोकर में सबसे अधिक फाइबर होता है, जो पाचन को दुरुस्त रखने में मदद करता है। मुलायम रोटियों के लिए चोकर निकाल देना स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा गेहूं की रोटियों को घी या मक्खन के साथ खाना लाभकारी माना जाता है। इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ता है, बल्कि गेहूं के पोषक तत्वों का अवशोषण भी बेहतर होता है और पाचन आसान बनता है। सुदामा नरवरे/2 जनवरी 2026