अंतर्राष्ट्रीय
03-Jan-2026
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ओटावा(ईएमएस)। कनाडा के इमिग्रेशन को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जो वहां रह रहे लाखों विदेशी नागरिकों, विशेषकर भारतीयों की रातों की नींद उड़ाने वाली है। नवीनतम आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, साल 2026 के मध्य तक कनाडा में लगभग 20 लाख लोगों का वर्क परमिट समाप्त होने जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस संकट की जद में आने वाले लोगों में से करीब आधे, यानी लगभग 10 लाख लोग भारतीय मूल के हैं। यदि ये लोग समय रहते अपने वीजा का विस्तार नहीं करा पाते या स्थायी निवास (पीआर) हासिल करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें अपना कानूनी दर्जा खोना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में, सालों की मेहनत, पढ़ाई और जमा-जमाया कारोबार छोड़कर उन्हें स्वदेश वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ सकता है। दरअसल, कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (आईआरसीसी) के आंकड़े बताते हैं कि देश में बड़ी संख्या में वर्क और स्टडी परमिट एक साथ समाप्त होने के कगार पर हैं। अनुमान है कि वर्ष 2025 के अंत तक करीब 10.5 लाख वर्क परमिट की अवधि पूरी हो जाएगी, वहीं 2026 में अतिरिक्त 9.27 लाख परमिट एक्सपायर होंगे। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ आउट ऑफ स्टेटस होना कनाडा के इतिहास में अभूतपूर्व है। 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 3.15 लाख परमिट खत्म होने की उम्मीद है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है। इस विकट स्थिति का सबसे बुरा प्रभाव भारतीय छात्रों और कामगारों पर पड़ने की आशंका है। कनाडाई सरकार द्वारा इमिग्रेशन नियमों में हालिया सख्ती, जैसे अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को सीमित करना और अस्थायी कामगारों के लिए कड़े मापदंड तय करना, ने स्थायी निवास की राह को और भी कठिन बना दिया है। इसके साथ ही, शरण (असाइलम) के दावों में बरती जा रही सख्ती और कई आवेदनों के खारिज होने से स्थिति और पेचीदा हो गई है। इस संकट का असर अब कनाडा की सड़कों और सामाजिक ढांचे पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ग्रेटर टोरंटो एरिया के ब्रैम्पटन और कैलडन जैसे इलाकों में सामाजिक चुनौतियां उभर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कानूनी दर्जा खो चुके कई लोग अब जंगलों या खाली जमीनों पर टेंट कॉलोनियां बनाकर रहने को मजबूर हैं। वहीं, कुछ मजबूर प्रवासियों द्वारा नकद भुगतान पर अवैध रूप से काम करने और फर्जी एजेंटों द्वारा गैरकानूनी तरीके से दस्तावेज तैयार कराने की खबरें भी चिंता बढ़ा रही हैं। सामाजिक संगठन और प्रवासी अधिकार कार्यकर्ता अब इस मुद्दे को लेकर मुखर हो रहे हैं। उनका तर्क है कि जिन अस्थायी कामगारों और छात्रों ने कनाडा की अर्थव्यवस्था और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उन्हें इस तरह अधर में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। नौजवान सपोर्ट नेटवर्क जैसे संगठन अब मौजूदा इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि सरकार पर इन मेहनतकश लोगों को कानूनी रूप से देश में बने रहने का मौका देने के लिए दबाव बनाया जा सके। यह संकट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों के सपनों और उनके सम्मान से जुड़ा एक मानवीय मुद्दा बन चुका है, जिसका समाधान समय रहते निकालना आवश्यक है। वीरेंद्र/ईएमएस/03जनवरी2026